Chandil: चांडिल दिशोम बाहा मे उमड़ा आस्था का जनसैलाब, मंत्री रामदास सोरेन हुए शामिल

चांडिल: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में मंगलवार को विभिन्न स्थानों पर धूमधाम के साथ बाहा बोंगा महोत्सव मनाया गया. इस महोत्सव का आयोजन आदिवासी समन्वय समिति चांडिल अनुमंडल द्वारा किया गया. यह आयोजन कुनाबुरू फुटबॉल मैदान, पातकोम दिसोम जाहेर गाढ़ गांगुडीह, और बिरसा मुंडा सरना समिति कुकड़ू अंचल सहित विभिन्न स्थानों पर हुआ.

 

प्राकृतिक पूजन और समृद्धि की कामना

इस अवसर पर आदिवासी समाज द्वारा सरहुल पर्व मनाया गया. सभी स्थानों पर नायके बाबा ने जाहेरथान में विधिवत पूजा-अर्चना की और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की. पूजा-अर्चना के बाद, प्रसाद स्वरूप सारजोम बाहा (साल का फूल) वितरित किया गया, जिसे महिलाओं ने अपने जुड़े में और पुरुषों ने अपने कानों में लगाया. इस आयोजन में आदिवासी परंपरा और समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली. सभी उम्र के लोग, चाहे पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे, मांदर की थाप पर सरहुल नृत्य कर रहे थे.

 

राज्य शिक्षा मंत्री का संदेश

चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेरगाढ़ में आयोजित झारखंड दिशोम बाहा (सरहुल) महोत्सव में राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए. उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासियों के प्रकृति के प्रति समर्पण और उनके अटूट प्रेम को दर्शाता है. यह पर्व आदिवासियों की आस्था, प्रकृति पूजक होने और उनकी रक्षा करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.

संस्कृति और नृत्य का संगम

आदिवासी समन्वय समिति चांडिल अनुमंडल द्वारा कुनाबुरू फुटबॉल मैदान में आयोजित सरहुल महोत्सव में संथाली, मुंडारी, उरांव और बिरहोर समाज के कलाकारों ने सरहुल नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी. इस दौरान “सारजोम बाहा हो मातकोम गेले” जैसे पारंपरिक गीतों पर मांदर की थाप पर सामूहिक नृत्य किया गया. यह बाहा पर्व आदिवासियों का दूसरा सबसे बड़ा पर्व है, जो प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है.

समृद्ध संस्कृति की झलक

पातकोम दिशोम जाहेर गाढ़ गांगुडीह में आयोजित सरहुल महोत्सव में आदिवासी संस्कृति की समृद्धि को महसूस किया गया. यहां जाहेरगाढ़ में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद लोगों के बीच सारजोम बाहा का वितरण किया गया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत के बाद, सभी ने मांदर की थाप पर सामूहिक सरहुल नृत्य किया.

कुकड़ू में भी मनाया गया उत्सव

कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत बिरसा चौक डाटम में बिरसा मुंडा सरना समिति कुकड़ू अंचल द्वारा मंगलवार को सरहुल पूजा और महोत्सव धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान आदिवासी महिला-पुरुषों ने मांदर की थाप पर जमकर नृत्य किया. इसके अलावा, हरबागढ़ की प्रकृतिक सरहुल नृत्य पार्टी और तामराना की आदिवासी संस्कृति सरहुल युवा समिति ने भी अपनी प्रस्तुति दी. यह आयोजन आदिवासी समाज की संस्कृति, उनके सामूहिक समृद्धि के प्रति श्रद्धा और प्रकृति से जुड़ी उनकी गहरी आस्था को प्रदर्शित करता है.

इसे भी पढ़ें : Chaibasa: चाईबासा में रंगों से सजा प्रकृति पर्व सरहुल, गाजे-बाजे के साथ निकला जुलूस


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