गुवा: झारखंड मजदूर यूनियन की एक विशेष बैठक गुवा में यूनियन अध्यक्ष दिनबंधु पात्रो की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में महासचिव दुलाल चाम्पिया, कार्यकारिणी सदस्य मधु सिद्धू, लखन चाम्पिया, सुखराम सिद्धू, बागी चाम्पिया, सादो देवगन, पंकज चाम्पिया सहित कई पदाधिकारी एवं मजदूर उपस्थित थे.
बैठक में टाटा स्टील लिमिटेड विजय-2 आयरन ओर माइंस के अंतर्गत कार्यरत विभिन्न वेंडरों के माध्यम से काम कर रहे मजदूरों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
यूनियन ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं से मजदूरों को वंचित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने टाटा स्टील के महाप्रबंधक से सभी वेंडरों की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर मजदूरों को समुचित सुविधा दिलाने की मांग की.
मधु इंटरप्राइजेज के तहत कार्यरत मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय बताई गई. मजदूरों को जंगल के रास्ते 10 किलोमीटर पैदल चलकर माइंस तक पहुंचना पड़ता है, जहाँ वे भालू, हाथी, सांप, सूअर और बिजली गिरने जैसे खतरों का सामना करते हैं. यूनियन ने मांग की कि इन मजदूरों को मुख्य गेट से पंचिंग कर ड्यूटी दी जाए और उन्हें आने-जाने के लिए वाहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
बीएस माइनिंग कंपनी से जुड़ी शिकायतों में कहा गया कि मजदूरों को भोजन की व्यवस्था नहीं दी जाती. उन्हें या तो भोजन दिया जाए या फिर उसके लिए राशि प्रदान की जाए. लगभग 20 वर्षों से कार्यरत श्रमिकों को उनके अनुभव और योग्यता के अनुसार वेतन में वृद्धि दी जाए.
माँ अन्नपूर्णा माइनिंग कंपनी और अन्य वेंडरों द्वारा सालाना इंक्रीमेंट अब तक लागू नहीं किया गया है, जबकि यह अप्रैल से ही लंबित है. मजदूरों को पॉलिथीन में भोजन दिए जाने की गंभीर शिकायत भी सामने आई. गर्म खाना प्लास्टिक में दिए जाने से गैस और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. यूनियन ने साफ-सुथरे स्टील के केन में भोजन उपलब्ध कराने की मांग की.
डोवर हुए 45 मजदूरों को वर्ष 2008 से 2013 तक की ग्रेच्युटी अब तक नहीं मिली है. यूनियन ने टाटा स्टील महाप्रबंधक से आग्रह किया कि इस पर जांच कर उचित भुगतान कराया जाए.
एस.एन. सिंह इंटरप्राइजेज द्वारा मजदूरों को नियमित 26 दिन काम नहीं दिया जा रहा है. ड्यूटी करने और पंचिंग के बावजूद उनकी हाजिरी दर्ज नहीं की जाती और वेतन में कटौती की जाती है, जो कि अनुचित है. इसी तरह नवीन रोडवेज द्वारा सुरक्षा उपकरण समय पर नहीं दिए जाते और वेतनमान में वृद्धि भी नहीं होती.
23 दिसंबर 2024 को हुए आंदोलन के बाद मजदूरों की कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ है. इससे मजदूरों में असंतोष गहराता जा रहा है.
झारखंड मजदूर यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का समाधान 15 दिनों के भीतर नहीं हुआ, तो यूनियन मजदूर हित में आंदोलन करने को बाध्य होगी. इसकी पूरी जिम्मेदारी टाटा स्टील लिमिटेड प्रबंधन की होगी.
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