Saraikela: गहरी नींद में था परिवार, आधी रात को मिट्टी की दीवार तोड़ अंदर घुसे दो हाथी

सरायकेला: चांडिल वन क्षेत्र अंतर्गत लुपुंगडीह पंचायत के बाना गांव में बीती रात दो विशालकाय ट्रस्कर हाथियों ने कहर बरपाया. रात लगभग 1.30 बजे, जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी हाथियों का दल रसूलिया जंगल की ओर से रेलवे ट्रैक पार कर गांव में घुस आया और अर्जुन सिंह सरदार (उम्र 60 वर्ष) के घर को निशाना बनाया.

हाथियों ने मिट्टी के घर की दीवार पर मस्तक से जोरदार हमला किया जिससे दीवार भरभराकर गिर पड़ी. गिरती दीवार की मिट्टी और ईंटें अर्जुन सिंह के ऊपर आ गिरीं. वे खटिया पर सो रहे थे और दीवार का मलबा सीधे उनके सिर और शरीर पर आ गिरा. पत्नी दूसरी खटिया पर पास ही सो रही थीं. किसी तरह वह भागकर बाहर निकलीं और शोर मचाया.

आंगन में खड़े होकर हाथी खाते रहे अनाज

एक हाथी तो घर के अंदर तक घुस आया और खड़े-खड़े अपनी सूंड़ से बोरों में रखे डेढ़ क्विंटल चावल और एक क्विंटल धान निकालकर खाने लगा. आंगन में फैले चावल हाथियों के भोज का हिस्सा बन गए. अर्जुन सिंह मलबे के नीचे दबे हुए थे, हिलने-डुलने में असमर्थ. पत्नी बेहुला सिंह ने भागकर ग्रामीणों को बुलाया. भतीजे की मदद से अर्जुन सिंह को घंटों बाद मिट्टी हटाकर बाहर निकाला गया.

घर के सामने खड़ी थी मौत, पर बच गई जान

अर्जुन सिंह ने बताया, “मेरा सिर जहां था, वहीं हाथी का पैर था. मैं आंखों से सब देख रहा था, लेकिन शरीर में हरकत नहीं कर पा रहा था. सामने मौत खड़ी थी.” प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें चांडिल स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं, पर डर अब भी कायम है.

ग्रामीणों ने भगाया हाथी, वन विभाग रहा नदारद

घटना की जानकारी ग्रामीणों ने तुरंत लुपुंगडीह पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि को दी, जिन्होंने चांडिल वन क्षेत्र के पदाधिकारियों को सूचना दी. परंतु, समाचार लिखे जाने तक वन विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. लोगों ने वन विभाग से मुआवजे की मांग की है.

बाना गांव बना हाथियों का स्थायी मार्ग

बाना गांव के पास का रसूलिया जंगल मात्र दो किलोमीटर दूर है. दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी और अयोध्या पहाड़ियों से हाथियों के झुंड भोजन की तलाश में भटकते हुए बाना जैसे गांवों में घुस जाते हैं. यहां बारहों महीने हाथियों की उपस्थिति बनी रहती है. खेत, खलिहान और घर – सब हाथियों के हमलों से असुरक्षित हैं.

किसान अर्जुन सिंह ने बताया कि उन्होंने धान बेचकर चावल खरीदा था ताकि बरसात में परिवार दो वक्त का भोजन कर सके. पर अब वह अनाज हाथियों की भूख का शिकार बन चुका है.

 

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