Saraikela: नगर पंचायत में भ्रष्टाचार की खुलीं परतें, फर्जी बिलिंग को लेकर फंसे प्रशासक शेखर सुमन

सरायकेला:  नगर पंचायत सरायकेला में व्याप्त गम्भीर भ्रष्टाचार को लेकर वर्तमान प्रशासक शेखर सुमन के विरुद्ध सख्त और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग उठी है. स्थानीय नागरिकों एवं विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह आरोप लगाया गया है कि प्रशासक अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बनाकर अनैतिक कार्य करवाते हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी नगर पालिका अधिनियमों का भय दिखाकर शोषण करते हैं.

जानकारी के अनुसार, नगर विकास विभाग द्वारा कार्यालय क्षमता संवर्धन के उद्देश्य से सरायकेला नगर पंचायत को ₹50 लाख की राशि आवंटित की गई थी. इस राशि का उपयोग नन-ब्रांडेड और घटिया गुणवत्ता के सामान खरीद में किया गया. इन सामानों की खरीद बाजार दर से चार गुना से लेकर दस गुना अधिक दर पर की गई, जिससे सरकारी राशि की जमकर लूटपाट हुई.

फर्जी बिलिंग और अनुपलब्ध वस्तुओं का भुगतान
कुछ प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं:

  1. ₹5000 की गोदरेज अलमारी को ₹50000 में खरीदा गया
  2. ₹80000 के प्रिंटर को ₹4 लाख में
  3. ₹5000 की कुर्सी ₹30000 में
  4. ₹10000 का सोफा सेट ₹70000 में खरीदा गया, जो कहीं दिखाई भी नहीं देता
  5. 5 टॉयलेट दरवाजों के लिए ₹25000 प्रति दरवाजा भुगतान हुआ, जबकि दरवाजे आपूर्ति ही नहीं हुए
  6. ₹25000 की दीवार घड़ी खरीदी गई, जो कहीं नज़र नहीं आती

 

इसके अलावा वॉटर प्यूरीफायर, फ्रिज, इनवर्टर बैटरी, सिंटेक्स की टंकी, फैन, मॉनिटर, एलसीडी, प्रोजेक्टर जैसे तमाम उपकरणों की खरीद भी भारी अनियमितता के साथ की गई है.

कहा जा रहा है कि प्रशासक ने संवेदकों से मिलीभगत कर सामानों का 4 से 10 गुना भुगतान करवाया. यह सीधे तौर पर सरकारी फंड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बनता है. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है.
सुमन के कार्यकाल में कार्यालय के सभी प्रकार की खरीदारियों — डीजल, ट्रैक्टर, ट्रॉली, बिजली उपकरण आदि — में लूट और घोटाले की आशंका है. कर्मचारियों ने बताया कि वे प्रशासक के डर और दबाव में रहकर अनैतिक कार्यों में अनचाहे रूप से शामिल हो रहे हैं. कार्यालय में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है.

स्थानीय लोगों ने नगर प्रशासन और उच्चाधिकारियों से अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर दोषी प्रशासक के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक शेखर सुमन को नगर पंचायत कार्यालय से दूर रखा जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रह सके.

 

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