
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद कि दिल्ली और एनसीआर से छह से आठ हफ्ते में सभी आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम्स में भेजा जाए, देशभर में बहस तेज हो गई है। नेताओं से लेकर बॉलीवुड सितारों तक इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पेटा, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, भाजपा नेता मेनका गांधी और प्रियंका चतुर्वेदी सहित कई लोगों ने इस आदेश पर चिंता जताई है। वहीं बॉलीवुड के कई सितारों ने भी केंद्र सरकार से इसमें दखल देने की मांग की है।
इस आदेश को लेकर मचे विवाद का मुद्दा बुधवार को फिर से सुप्रीम कोर्ट में उठा। एक वकील ने आदेश के खिलाफ याचिका दायर करते हुए कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला दिया। वकील ने कहा कि यह सामुदायिक कुत्तों का मामला है और सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में साफ कहा गया था कि किसी भी परिस्थिति में कुत्तों की अंधाधुंध हत्या नहीं की जा सकती और सभी जीवों के प्रति करुणा होनी चाहिए। इस फैसले में जस्टिस करोल भी शामिल थे। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा कि बेंच पहले ही फैसला सुना चुकी है, लेकिन वह इस मामले को देखेंगे।
सोमवार का आदेश और कोर्ट की सख्ती
11 अगस्त को जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर भेजने का आदेश दिया था। कोर्ट ने रेबीज और कुत्तों के हमलों से होने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए कहा था, “क्या डॉग लवर्स उन लोगों को वापस ला सकते हैं जिनकी रेबीज से मौत हो गई?”
कुत्तों को गोद लेने का सुझाव और कोर्ट का जवाब
एनिमल एक्टिविस्ट ने सुझाव दिया कि कुत्तों को गोद लेकर घर में रखा जा सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्ता रातों-रात पालतू नहीं बन जाएगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को हेल्पलाइन नंबर जारी करने, शिकायत मिलने के चार घंटे के भीतर काटने वाले कुत्ते को पकड़ने, स्टरलाइज और इम्म्यूनाइज कर शेल्टर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि कुत्तों को किसी भी हालत में वापस बाहर न छोड़ा जाए और इसमें बाधा डालने वालों पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के तहत कार्रवाई होगी। नगर निगमों को छह हफ्ते में कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
भारत में आवारा कुत्तों की संख्या
भारत में आवारा कुत्तों की सटीक संख्या का ताज़ा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन 2019 की 20वीं पशुधन जनगणना के अनुसार, देशभर में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे। वहीं, गैर-आधिकारिक आंकड़े इनकी संख्या 6 करोड़ से अधिक बताते हैं। दिल्ली में ही 2019 में यह संख्या लगभग आठ लाख थी, जो अब 10 लाख के पार मानी जा रही है।
कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि आवारा कुत्ते सड़क हादसों का बड़ा कारण हैं। 2022 की एक बीमा रिपोर्ट के अनुसार, छह महानगरों में पशुओं के कारण होने वाले हादसों में 58% मामलों में कुत्ते जिम्मेदार थे।
दुनिया में आवारा कुत्तों की समस्या और निपटने के उपाय
आवारा कुत्तों की समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। चीन, थाईलैंड जैसे पूर्वी देशों से लेकर नीदरलैंड्स और तुर्किये जैसे पश्चिमी देशों में भी सरकारों को इस मुद्दे से निपटने में लंबा संघर्ष करना पड़ा। कई देशों में टीकाकरण, नसबंदी, पंजीकरण, सार्वजनिक जागरूकता अभियान और शेल्टर बनाना इस समस्या से निपटने के प्रमुख उपाय रहे हैं।
नीदरलैंड्स का मॉडल
नीदरलैंड्स में 19वीं और 20वीं सदी में आवारा कुत्तों की समस्या सबसे ज्यादा उभरी थी। शुरुआत में सरकार ने कुत्तों को पकड़कर बंद करने और बेसहारा छोड़ने वालों पर टैक्स लगाने जैसे कदम उठाए, लेकिन यह नाकाम रहे। 20वीं सदी के अंत तक नीदरलैंड्स ने नसबंदी, टीकाकरण और पंजीकरण आधारित तकनीक अपनाई। नतीजा यह हुआ कि 1923 के बाद से वहां रेबीज के मामले नहीं आए और करीब 90% घरों में कुत्ते परिवार का हिस्सा बन गए।
थाईलैंड की सफलता
बैंकॉक में आवारा कुत्तों की समस्या काफी बड़ी थी। 2016 से 2023 के बीच मोबाइल क्लीनिक, सामुदायिक अभियान और डेटा ट्रैकिंग के जरिए इन कुत्तों की निगरानी शुरू की गई। नतीजतन कुत्तों के काटने के मामलों में कमी आई और रेबीज पर नियंत्रण में भी सफलता मिली।
भूटान की पूरी तरह व्यवस्था
भूटान दुनिया का पहला देश है, जहां सभी आवारा कुत्तों का पूरी तरह टीकाकरण और नसबंदी कर दी गई। कुछ हजार कुत्तों के लिए यह कार्यक्रम लगातार चलाया गया ताकि आम लोगों की परेशानी जल्द से जल्द कम की जा सके।
तुर्किये का विवादास्पद तरीका
तुर्किये में आवारा कुत्तों के कारण आम लोगों पर हमलों के बाद सरकार ने जहर देकर उन्हें मारने की योजना लागू की, जिसे बाद में कानूनी रूप दिया गया। हालांकि, जानवरों के अधिकार समूहों ने इसका विरोध किया। 2004 में नीदरलैंड्स जैसा कार्यक्रम अपनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कम फंडिंग, खराब प्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण योजना नाकाम रही। 2024 में तुर्किये ने नया कानून लागू किया, जिसके तहत नगरपालिकाओं को आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने की अनुमति है, जहां नसबंदी और टीकाकरण किया जाएगा। कुछ कुत्तों को गोद लेने की अनुमति है, लेकिन आक्रामक, बीमार या लाइलाज कुत्तों को मारने का नियम भी है।
बॉलीवुड से भी विरोध के स्वर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ बॉलीवुड से भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अभिनेता जॉन अब्राहम ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर फैसले की समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि ये ‘आवारा’ नहीं बल्कि सामुदायिक कुत्ते हैं और इन्हें हटाना एबीसी नियम, 2023 के विपरीत है। अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने सोशल मीडिया पर एक पिटीशन साझा कर कहा कि ये कुत्ते हमारे समाज का हिस्सा हैं और इन्हें सड़कों से हटाना न तो व्यावहारिक है और न ही नैतिक।
अभिनेता वरुण धवन और अभिनेत्री रवीना टंडन ने भी इस आदेश का विरोध किया। रवीना ने कहा कि अगर स्थानीय निकायों ने नसबंदी और टीकाकरण पर समय रहते काम किया होता, तो यह समस्या इतनी बड़ी नहीं होती। सोनाक्षी सिन्हा ने भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालकर नाराजगी जताई।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें केवल इसलिए खतरे में नहीं डाला जा सकता कि कुछ लोग खुद को ‘एनिमल लवर’ मानते हैं। इस टिप्पणी ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को और नाराज कर दिया है।
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