
जमशेदपुर: इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देशभर में भक्तजन श्रद्धा और उल्लास के साथ लड्डू गोपाल जी के बाल स्वरूप की पूजा करेंगे। मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के आयोजन के साथ मंदिरों और घरों में विशेष भक्ति माहौल रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की पूजा से दुख-कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
अष्टमी तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति
इस बार अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11:49 बजे शुरू होकर 16 अगस्त को रात 9:34 बजे समाप्त होगी। हालांकि, शास्त्रानुसार अष्टमी तिथि जो उदया के समय हो, वही मान्य होती है। इस कारण व्रत और पूजा 16 अगस्त को करना ही उचित माना जा रहा है। पारण 17 अगस्त की सुबह किया जाएगा।
शुभ मुहूर्त
पूजा का श्रेष्ठ समय 16 अगस्त की रात 12:04 से 12:47 बजे तक है, जिसे निशीथ काल कहा जाता है। यही वह पवित्र क्षण है जब श्रीकृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था।
जन्माष्टमी पर लगाएं ये विशेष भोग
माखन-मिश्री: भगवान की प्रिय माखन-मिश्री का भोग शुभ माना जाता है।
पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत अभिषेक और भोग दोनों में प्रयोग होता है।
पंजीरी: जन्माष्टमी पर पंजीरी का प्रसाद अर्पित करने की विशेष परंपरा है।
लौकी या खोए का पाग: इस दिन कई घरों में भगवान के लिए विशेष मिठाई ‘पाग’ बनाई जाती है।
व्रत के नियम
सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
दिनभर संयम और पवित्रता बनाए रखें।
फलाहार में फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू के आटे से बने व्यंजन लें।
तामसिक भोजन, अन्न और नमक से परहेज करें।
रात 12 बजे जन्म के बाद ही व्रत का पारण करें।
पूजा में काले रंग का प्रयोग न करें।
पूजा के विशेष निर्देश
लड्डू गोपाल जी को स्नान कराने से पहले पंचामृत तैयार करें और तुलसी पत्र अवश्य अर्पित करें। पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और ताजे फूलों से सजाएं। मंत्रोच्चारण के साथ रात 12 बजे आरती करें और जन्मोत्सव मनाएं।
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