Gua : राजाबुरु खदान में स्थानीय लोगों की बहाली की मांग तेज, ग्रामीणों ने दी चक्का जाम की चेतावनी

  • गुवा सेल प्रबंधन पर उपेक्षा का आरोप, सात गांवों के ग्रामीणों में गहराया असंतोष

गुवा : गुवा सेल प्रबंधन द्वारा राजाबुरु खदान में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दिए जाने को लेकर क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को गुवा थाना क्षेत्र के काशिया पेचा गांव में सात गांवों के ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में काशिया पेचा, बाईहातु, जोजोगुटू, गंगदा, घाटकुरी, जामकुंडिया एवं राजाबेड़ा गांव के मुंडा, मानकी, डाकुआ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता काशिया पेचा गांव के मुंडा नंदलाल सुरीन एवं समाजसेवी मांगता सुरीन ने की। ग्रामीणों ने बैठक में एक स्वर में गुवा सेल प्रबंधन पर स्थानीयों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

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बीटी मेडिकल और पर्यावरणीय नुकसान का उठा मुद्दा

बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि राजाबुरु खदान में बहाली के दौरान सात गांवों के ग्रामीणों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि अन्य गांवों के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर बीटी मेडिकल कराकर रोजगार दिया जा रहा है। मुंडा नंदलाल सुरीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इन सात गांवों के ग्रामीणों का बीटी मेडिकल नहीं कराया जाएगा और उन्हें रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि खदान क्षेत्र से निकलने वाला लाल पानी गांवों के खेतों में घुसकर उन्हें बंजर बना रहा है। इसके साथ ही खदान से उड़ने वाली धूल के कारण ग्रामीणों में कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

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सकारात्मक पहल नहीं हुई तो होगा चक्का जाम

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि गुवा सेल प्रबंधन ने शीघ्र ही स्थानीय बहाली और पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो सातों गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर रणनीति तैयार करेंगे और राजाबुरु खदान का चक्का जाम करेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति की संपूर्ण जवाबदेही गुवा सेल प्रबंधन की होगी। बैठक में राजेश सांडिल, पवन चाम्पिया, कानूराम देवगम, मानसिंह चाम्पिया, सुरूदास सुरीन, हारी चाम्पिया, सर्गीया चाम्पिया, सोमा चाम्पिया, सागोराम सुरीन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे और सभी ने आंदोलन को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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