जमशेदपुर : दलमा बुरू सेंदरा समिति व वन्य विभाग की बैठक सोमवार को दलमा राजा राकेश हेम्ब्रम के अध्यक्षता में उनके गदड़ा स्थित आवास पर हुई. बैठक में सेंदरा को लेकर वन्य विभाग की तैयारी एवं आदिवासी समाज की तैयारी एवं समस्याओं पर चर्चा की गई. बैठक में उपस्थित जुगसलाई तोरोप परगना दसमत हांसदा एवं झारखंड आन्दोलनकारी डेमका सोय ने वन्य विभाग के अधिकारियों को बताया कि दलमा बुरू सेंदरा आदिवासी समाज की पारंपरिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के रूप में सदियो से मनायी जा रही परंपरा है. इस दौरान अधिकारियों को बताया गया कि सेंदरा के लिए आने वाले आदिवासियो को रोकने और रास्ते मे चेकनाका बना कर तीर धनुष जब्त करने, वन विभाग के पदाधिकारियों द्वारा सेंदरा के लिए आने वाले आदिवासियो को जंगली आदिवासी कह कर प्रताड़ित करने तथा तीर धनुष जब्ती के गत वर्षो के घटनाओ की ओर ध्यान दिलाते हुए मांग किया गया कि वन विभाग सेंदरा के लिए आने वाले आदिवासियों को बस स्टैंड या रेलवे स्टेशनो पर जबरन डराने धमकाने की घटनाओं पर रोक लगाए. इस पर रेंजर द्वारा लिखित में गारंटी दी गयी है कि वे विभाग के आला अधिकारियो को इस सबंध मे जानकारी देगें तथा तीर धनुष जैसे पारंपरिक औजार की जब्ती नही की जायेगी
दिशोम गुरू की स्मृति में की जाएगी पत्थरगढ़ी
सेंदरा के पूर्व संध्या पर दलमा के तलहटी में इस बार दिशोम गुरु शिबू सोरेन के स्मृति में पूजा स्थल पर पत्थलगढ़ी करने का निर्णय लिया गया. इसकी जानकारी वन्य विभाग के अधिकारियो को दी गई. विभाग के अधिकारियों ने इसपर अपनी सहमति दी. इसी तरह आदिवासी समाज की ओर से सुतान टांडी में आयोजित होने वाली ला बीर दरबार की पारंपरिक व्यवस्था में सहयोग कर सांस्कृतिक धरोहर को सुदृढ़ता के साथ मनाने की दोलमा बुरू सेंदरा समिति के आयोजन को पूर्व की तरह सहयोग दी जायेगी.
लंबित सड़क योजनाओं की एनओसी देने की उठी मांग
बैठक में वन विभाग द्वारा डिमना लेक के आस-पास के वन ग्रामों के सड़को तथा आवागमन के मुख्य मार्गो को अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत नही किये जाने के कारण पुनसा ग्राम समेत अन्य ग्रामों के मुख्य सड़क के निर्माण की त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही है. इस संबंध में उचित कार्रवाई की मांग रखी गयी जिसपर रेंजर ने सहमति दी. अन्यथा दोलमा बुरू सेंदरा समिति आन्दोलन करने को बाध्य होगी
वन में आगजनी में ग्रामीणों की संलिप्तता से इंकार
बैठक मे वन विभाग द्वारा दोलमा बुरू में आगजनी की घटनाओं पर रोकथाम के लिए दोलमा बुरू सेंदरा समिति से अनुरोध किया गया. इस पर दलमा के आस पास आए ग्राम वासियों ने वन में आगजनी की घटनाओं में ग्रामीणों की सलिंप्तता से साफ साफ इंकार करते हुए बताया गया कि वन के सूखे पत्तों के बीच घर्षण के कारण वन में आग लगती है. किसी भी ग्राम के आदिवासी वन में कभी भी आग नही लगाते हैं. वन विभाग द्वारा आदिवासियों पर वन में आग लगाने का मिथ्या आरोप पर राजनीति न करने का अनुरोध किया गया. जबकि सच्चाई यह है कि वन में आग लगने पर ग्रामवासी ही बगैर विभाग के सहयोग या समर्थन के आग बुझाने के लिए हमेशा आगे रहते हैं.
बैठक में यह रहे मौजूद
बैठक में सेंदरा के अवसर गाजे बाजे के साथ भारी संख्या में इस दलमा पर चढ़ने का संकल्प लिया गया. बैठक में जुगसलाई तोरोप परगना दसमत हांसदा, झारखंड आन्दोलनकारी डेमका सोय, लालसिंह गगराई, जेना जामूदा, संपूर्ण संवैया, लिटा बानसिंह, कार्तिक सोरेन, सोम मूर्मू, जितेन मूर्मू, हिरोध सोरेन, बुद्धेशवर मूर्मू, अजीत बेसरा, मिथून मूर्मू, धनू मार्डी, बाबू बरदा समेत अन्य ग्रामवासी मोजूद थे.



















































