पटना: राजधानी पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात प्रसिद्ध व्यवसायी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई. खेमका बिहार के व्यापारी वर्ग में एक जाना-पहचाना नाम थे.
यह वारदात राज्य की कानून व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा कर गई है, विशेषकर ऐसे समय में जब बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. गोपाल खेमका के पुत्र गुंजन खेमका की भी छह वर्ष पूर्व वैशाली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
पॉश इलाके में हुए इस दुस्साहसिक कृत्य ने आम लोगों और व्यापारियों के बीच भय और आक्रोश दोनों को जन्म दिया है.
राहुल गांधी का तीखा हमला– ‘अब वक्त है नए बिहार का’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने लिखा—
“बिहार लूट, गोली और हत्या के साये में जी रहा है. अपराध यहां नया नॉर्मल बन चुका है और सरकार पूरी तरह नाकाम है.”
राहुल ने नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि ऐसी सरकार, जो लोगों की सुरक्षा नहीं कर सकती, वह उनके भविष्य की जिम्मेदारी भी नहीं ले सकती.
उन्होंने कहा—
“हर हत्या, हर लूट, हर गोली– एक चीख है बदलाव की. अब वक्त है नए बिहार का, जहां डर नहीं, तरक्की हो. इस बार वोट सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बिहार को बचाने का है.”
तेजस्वी यादव बोले– ‘क्या अब भी जंगलराज नहीं कहेंगे?’
राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा—
“थाना से चंद कदम की दूरी पर पटना में बिहार के बड़े व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हर महीने राज्य में सैकड़ों व्यापारियों की हत्या हो रही है. फिर भी क्या इसे जंगलराज नहीं कहेंगे?”
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सरकार मीडिया प्रबंधन और छवि निर्माण में लगी हुई है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है. उन्होंने इसे व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया.
खेमका की हत्या: व्यापारिक वर्ग में आक्रोश और भय
गोपाल खेमका की हत्या से बिहार का व्यापारी वर्ग स्तब्ध है. उनकी व्यावसायिक छवि और सामाजिक पहुँच काफी प्रभावशाली थी.
व्यापारियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल जान-माल की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती हैं, बल्कि निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करती हैं.
चुनावी मौसम में विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा
राज्य में चुनावी तैयारियों के बीच यह हत्याकांड विपक्ष के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है. अपराध और सुरक्षा जैसे विषय पहले से ही बहस में हैं और अब खेमका की हत्या ने विपक्ष को सरकार को घेरने का नया अवसर दे दिया है.
अब देखना होगा कि सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और विपक्ष इसे चुनावी रणनीति में किस रूप में शामिल करता है.
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