सबसे ज्यादा ड्राप आउट बच्चों को स्कूल में नामांकित करने वाले व्यक्ति को जिला स्तर पर किया जाएगा सम्मानित
जमशेदपुर : समाहरणालय सभागार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड द्वारा संचालित ‘स्कूल रुआर 2026’ कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यशाला में अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम अर्नव मिश्रा, डीईओ मनोज कुमार, डीएसई आशीष पांडेय, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, सीआरपी, प्रधानाध्यापकों एवं अन्य संबंधित ने भाग लिया।
उपायुक्त ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि अभियान में व्यक्तिगत रूचि लेते हुए सफल बनायें, सिर्फ तकनीकी रूप से आंकड़े सही नहीं दिखें बल्कि वास्तव में इस अभियान का फलाफल धरातल पर दिखे । उपायुक्त ने उक्त अभियान की सफलता को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं ग्राउंड लेवल वर्कर की भूमिका पर विशेष बल दिया। साथ ही बीआरपी, सीआरपी, प्रधानाध्यापक, शिक्षक के दायित्वों को रेखांकित करते हुए जिला के शत प्रतिशत ड्राप आउट बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ने हेतु व्यक्तिगत स्तर पर पहले करें। उन्होने आवाह्न किया कि सबसे ज्यादा ड्राप आउट बच्चों को स्कूल में नामांकित करने वाले व्यक्ति को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर न रहे, नामांकन से वंचित बच्चों की पहचान कर उनका शीघ्र नामांकन कराया जाए।
‘स्कूल रुआर 2026’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के प्रत्येक 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। कार्यशाला में बताया गया कि कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी से जुड़े 5+ आयुवर्ग के सभी बच्चों का प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन एवं उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। कक्षा 1 से 11 तक के सभी बच्चों की अगली कक्षाओं में शत-प्रतिशत नामांकन एवं उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। नव-नामांकित बच्चों की नियमित उपस्थिति पर विशेष जोर दिया जाएगा। अप्रवासी, अनाथ एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को चिन्हित कर उनका नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।
उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि दिनांक 09 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करें तथा शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र स्तर पर टीम बनाकर घर-घर सर्वे कर छूटे हुए बच्चों की सूची तैयार करें और उनका नामांकन सुनिश्चित करें। कार्यशाला में यह भी निर्देश दिया गया कि अनुपस्थित छात्रों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें विद्यालय भेजने हेतु प्रेरित किया जाए।
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