Jamshedpur: “भूमिहार ब्राह्मण विवाह बंधन” 2025-26 अंक के लिए नामांकन हेतु हुई वर्चुअल बैठक

जमशेदपुर: “भूमिहार ब्राह्मण विवाह बंधन” नामक वैवाहिक पत्रिका के 2025-26 अंक हेतु नामांकन प्रक्रिया के शुभारंभ के लिए टेलीग्राम समूह “भूमिहार ब्राह्मण विवाह बंधन – बातें” पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अनंतानंत सरस्वती जी (काशी, राजगुरु पीठाधीश्वर) रहे. विशिष्ट अतिथि के रूप में हूलासगंज, जहानाबाद के कृपा पात्र आचार्य डॉ. रंगेश शर्मा तथा स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज उपस्थित रहे. इनके कर कमलों द्वारा गूगल फॉर्म का विधिवत लोकार्पण किया गया.

गूगल फॉर्म से जुड़ेंगे देश-विदेश के परिवार
बैठक की अध्यक्षता करते हुए शंकराचार्य स्वामीजी ने बताया कि पत्रिका के छठे संस्करण हेतु एक डिजिटल गूगल फॉर्म जारी किया गया है. भारत के कोने-कोने से लेकर विदेशों तक बसे भूमिहार ब्राह्मण परिवार अब इस फॉर्म के माध्यम से अपने पुत्र-पुत्रियों का बायोडेटा और फोटो भेज सकेंगे. स्वामीजी ने अपने संबोधन में वैदिक दृष्टिकोण से विवाह को एक विशुद्ध संस्कार बताया. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण परंपरा केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि धर्म रक्षा, समाज नेतृत्व और आत्मिक अनुशासन की रही है.

उन्होंने कहा, “सत्ययुग में वशिष्ठ, त्रेता में परशुराम, द्वापर में द्रोणाचार्य-कृपाचार्य-अश्वत्थामा और कलियुग में चाणक्य जैसे नेतृत्व को जन्म देने वाला ब्राह्मण समाज आज भी जागरूक है. विवाह केवल सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वह संस्कार है जिसमें वर ‘नारायण’ और वधू ‘लक्ष्मी’ स्वरूप होती है.”

स्वामीजी ने आज के सामाजिक विघटन और पारिवारिक संकटों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की. एक युवती द्वारा विवाह पर उठाए गए प्रश्न – “विवाह क्यों करें, जब माता-पिता ही साथ नहीं रहते?” – पर उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से उदाहरण दिया कि विवाह, त्याग और आदर्श का मार्ग है, केवल साथ रहने का अनुबंध नहीं. उन्होंने कहा, “श्रीराम का विवाह हुआ, लेकिन वे 14 वर्षों तक वनवास में रहे. विवाह एक संकल्प है, निष्ठा है, केवल सहजीवन नहीं.”

भूमिहारों को “क्रिमिनल” बताने के प्रयासों पर विरोध
स्वामीजी ने हालिया समय में भूमिहार ब्राह्मण समाज को अपराधी बताने के प्रयासों की आलोचना करते हुए कहा, “हम क्रिमिनल नहीं, हम संरक्षक हैं. हमारे पूर्वजों ने हजारों बीघा जमीन दान कर दलितों को बसाया. राजनारायण ने विश्वनाथ मंदिर में दलितों का प्रथम प्रवेश कराया और वैद्यनाथ धाम में यह कार्य पं. श्रीकृष्ण बाबू ने किया. ऐसे ऐतिहासिक योगदानों पर विमर्श होना चाहिए.”

संगठन निर्माण की दिशा में उठे कदम
उन्होंने कहा कि जिस तरह विवाह पत्रिका के माध्यम से समाज को जोड़ा जा रहा है, उसी तरह समाज को जागरूक करने के लिए विभिन्न संगठनों की आवश्यकता है. यही समाज की आत्मा को शक्ति देगा. पत्रिका के डिजिटल संस्करण का प्रकाशन दशहरा के पावन अवसर पर किया जाएगा.

बैठक में राष्ट्रीय सहभागिता
इस वर्चुअल आयोजन में देश-विदेश के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन एवं विषय प्रवेश जमशेदपुर से पत्रिका के संपादक सुधीर कुमार सिंह ने किया. स्वागत भाषण अरविंद चौधरी (कनाडा) द्वारा एवं गूगल फॉर्म के निर्माता उज्ज्वल सम्राट (जमशेदपुर) ने तकनीकी पक्ष साझा किया. धन्यवाद ज्ञापन विनोद शुक्ला (जमशेदपुर) ने किया.

मुख्य रूप से उपस्थित गणमान्य:
डॉ. रघुनंदन प्रताप शाही (गुजरात), अशोक कुमार सिंह (बेगूसराय), राकेश कुमार राय (बोकारो), कुमार कुमुद (मोतिहारी), अनिल सिंह (सिवान), बिमल कुमार ओझा (एयर फोर्स), डॉ. अनामिका प्रभात (जमशेदपुर), कुमार गौरव कश्यप (पटना), एस. बी. सिंह (एडवोकेट), पल्लवी भारती, धीरज कुमार (कोलकाता), सत्येंद्र शर्मा (सारण) सहित अन्य लोग भी कार्यक्रम से जुड़े. अशोक कुमार मिश्रा, कृष्णानंदन सिंह, सूरज सिंह, सुषमा सिंह, रमेश कुमार मिश्रा (राजस्थान) की उपस्थिति उल्लेखनीय रही.

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