जमशेदपुर: सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर जमशेदपुर न्यायालय के वरीय अधिवक्ता एवं समाजवादी चिंतक सुधीर कुमार पप्पू ने अपने आवासीय कार्यालय में दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस दौरान उपस्थित लोगों ने अशोक के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके विचारों को नमन किया.
“अहिंसा से मिली विजय, तलवार से नहीं” — सुधीर पप्पू
अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि सम्राट अशोक ने अपने जीवन में यह सिद्ध कर दिया कि जो प्रेम और अहिंसा से हासिल किया जा सकता है, वह बल और हिंसा से नहीं. उन्होंने कलिंग युद्ध के पश्चात हथियार त्यागकर मानवता, बौद्ध धर्म और शांति के मार्ग को अपनाया. यह परिवर्तन केवल भारत ही नहीं, पूरे एशिया के इतिहास को बदलने वाला साबित हुआ.
बौद्ध धर्म का विस्तार बना सम्राट अशोक की विश्वदृष्टि की मिसाल
पप्पू ने कहा कि सम्राट अशोक ने तलवार की जगह करुणा और संवाद को अपनाया. उनके प्रयासों से बौद्ध धर्म श्रीलंका, तिब्बत, चीन, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला. उनकी नीति ने न केवल धर्म का विस्तार किया, बल्कि कला, विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में भारत को स्वर्ण युग की ओर अग्रसर किया.
“धर्म के नाम पर हो रही राजनीति भारत को कमजोर कर रही है”
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में टिप्पणी करते हुए पप्पू ने कहा कि आज देश में धर्म के नाम पर जो विभाजनकारी राजनीति हो रही है, वह राष्ट्र को कमजोर और समाज को खंडित कर रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को सम्राट अशोक के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए. तभी हम उस स्वर्ण युग की ओर लौट सकते हैं जिसकी आकांक्षा हर भारतीय करता है.
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में अशोक सिंह, हरिदास, सर्वेश प्रसाद, अरुण जॉन, राहुल भट्टाचार्य, भोलानाथ साहू, सतीश शर्मा, हरिश्चंद्र साहू सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे. सभी ने सम्राट अशोक के जीवन और दर्शन को वर्तमान भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया.
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