- पंथ अकाली तरना दल की मान्यता और त्रिपुरा राजघराने की प्रशंसा से बढ़ा मान
जमशेदपुर : जमशेदपुर से त्रिपुरा राज्य के दो दिवसीय दौरे पर गई बाबा बंदा सिंह बहादुर गतका अखाड़ा की टीम जमशेदपुर वापस लौट आई है। इस दौरे के दौरान टीम ने अपने हैरतअंगेज और अनुशासित गतका प्रदर्शन से दर्शकों, आयोजकों और धार्मिक संस्थाओं का दिल जीत लिया। अगरतल्ला स्थित गांधीघाट गुरुद्वारा साहिब में दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर आयोजित भव्य समागम में टीम को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। वहां प्रस्तुत पारंपरिक सिख युद्धकला के प्रदर्शन को न केवल धार्मिक संगत बल्कि स्थानीय प्रशासन और समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने भी खूब सराहा। यह दौरा अखाड़े के लिए एक यादगार और ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया।
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पंथ अकाली तरना दल ने दी सांस्थानिक मान्यता
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पंजाब के प्रतिष्ठित पंथ अकाली तरना दल ने बाबा बंदा सिंह बहादुर गतका अखाड़ा को अपनी सांस्थानिक मान्यता प्रदान की। पंथ अकाली तरना दल के मौजूदा प्रधान जत्थेदार प्रगट सिंह ने अखाड़े के प्रदर्शन से प्रभावित होकर टीम को अपने संगठन का हिस्सा घोषित किया। उन्होंने भविष्य में हर प्रकार के सहयोग और मार्गदर्शन का आश्वासन भी दिया। गुरुद्वारा सिंह सभा मानगो के महासचिव एवं अखाड़ा प्रमुख सरदार जसवंत सिंह जस्सू ने इसे जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय बताया। यह मान्यता अखाड़े की वर्षों की मेहनत और समर्पण का प्रतिफल मानी जा रही है।
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महाराजा प्रद्योत बिक्रम ने व्यक्तिगत रूप से की भेंट
त्रिपुरा के शाही माणिक्य वंश के सदस्य और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्तित्व महाराजा प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मन ने स्वयं गतका टीम से मुलाकात कर उनके प्रदर्शन की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने इसे सिख परंपरा, अनुशासन और साहस का जीवंत उदाहरण बताया। सरदार जसवंत सिंह जस्सू ने बताया कि महाराजा प्रद्योत बिक्रम त्रिपुरा के अंतिम शासक महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य देब बर्मन के पुत्र हैं और राज्य की संस्कृति व विरासत के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उनका इस तरह टीम से मिलना खिलाड़ियों के लिए बड़ा सम्मान और प्रेरणा का स्रोत बना।
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देशभर में पहचान बना चुका है जमशेदपुर का गतका दल
गौरतलब है कि इस समागम में अखाड़े की 12 सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें जसवंत सिंह जस्सू, हरप्रीत सिंह, गगनदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, तरणप्रीत कौर, सिमरप्रीत कौर, मनप्रीत सिंह (बारीडीह), मनिंदर सिंह, लवप्रीत सिंह, मनप्रीत सिंह (न्यू बारीडीह), जगदीप सिंह और गुरविंदर सिंह शामिल थे। यह जमशेदपुर का पहला गतका ग्रुप है, जो अब तक बंगाल, ओडिशा, बिहार, पंजाब और जयपुर सहित कई राज्यों में अपनी प्रस्तुति दे चुका है। यह टीम न केवल सिख परंपरा का प्रचार कर रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जमशेदपुर का नाम भी रोशन कर रही है।