जमशेदपुर: आज मानगो क्षेत्र के 12 मौजा के मांझी, मुंडा, मानकी-मुंडा और उरांव समाज के पारंपरिक नेता और दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता एक ऐतिहासिक सभा में एकजुट हुए। यह बैठक आदिवासी बचाव संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित की गई थी।
बैठक में उपस्थित सभी समाजिक नेताओं ने कुर्मी/कुरमी/महतो समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने की मांग का जोरदार विरोध किया।
उन्होंने इसे आदिवासी अस्मिता, पहचान और ऐतिहासिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।
सभा में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाती है, तो सिर्फ कोल्हान नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की धरती से उलगुलान की आग भड़क उठेगी।
सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि 9 अक्टूबर को मानगो क्षेत्र में आदिवासी जन आक्रोश महारैली आयोजित की जाएगी। इस रैली में मानगो क्षेत्र से 50,000 से अधिक आदिवासी पुरुष, महिला और युवा पारंपरिक पोशाक और हथियारों के साथ शामिल होंगे। बाबा तिलका मांझी चौक, डिमना से रैली शुरू होकर साकची आमबगान और वहां से उपायुक्त कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम तक कूच करेगी। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह रैली केवल विरोध नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की एकजुटता, स्वाभिमान और इतिहास की रक्षा का संकल्प है।
बैठक में डिमना के मांझी बाबा दीपक मुर्मू, डेमका सोय, मदन मोहन सोरेन, दीपक मांझी, गोमिया सुंडी, कृपा मार्डी, विजय सोय, कैलाश बिरूवा, दीपक सुंडी, सुनील हेंब्राम, किसान बोदरा, दाइघुटू मांझी, बिरेन मुर्मू, राजेंद्र सोरेन, दूर्गा मुर्मू, सोमेश चंद्र मुर्मू, सुरजू बास्के, संजय मुर्मू, दुर्गा चरण बारीइ, भानु टुडू, मंगल मुर्मू, मोंटू मुर्मू सहित अनेक समाजसेवी और ग्राम प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभा में यह संदेश दिया गया कि “जब बात अस्मिता और अस्तित्व की होगी, तो आदिवासी समाज मांदर की थाप पर लाखों की हुंकार बनकर सामने आएगा।”
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