कोडरमा: झारखंड राज्य किसान सभा का दो दिवसीय राज्यस्तरीय शिक्षण शिविर 17-18 अगस्त को सहाना गार्डेन, कोडरमा में राज्य अध्यक्ष सुफल महतो की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। शिविर में किसानों की समस्याओं, कृषि नीतियों और आंदोलन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कृष्ण प्रसाद ने धान किसानों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए कहा कि सीमित एमएसपी व्यवस्था के कारण किसानों को हर साल लगभग 6000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक हेक्टेयर में 62,415 रुपये की लागत आती है, जबकि खुले बाजार में मिलने वाली कीमत से मात्र 40,700 रुपये ही आमदनी होती है। उन्होंने धान किसानों को संगठित संघर्ष का आह्वान किया।
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अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव अवधेश कुमार ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 13 माह चले किसान आंदोलन ने देश की कृषि व्यवस्था को बचाया। उन्होंने कहा कि सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और बिरसा मुंडा की संघर्ष परंपरा को आगे बढ़ाते हुए झारखंड में किसान आंदोलन ही राज्य को बचा सकता है।
केंद्रीय किसान कमिटी सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी ने किसान सभा की 1936 से अब तक की संघर्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए झारखंड सहित पूरे देश में किसान आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।
राज्य महासचिव सुरजीत सिन्हा ने झारखंड में किसानों की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की और जल-जंगल-जमीन, विस्थापन एवं वनपट्टा जैसे मुद्दों पर आंदोलन पर जोर दिया। वहीं राज्य अध्यक्ष सुफल महतो ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलना किसानों के लिए मौत की घंटी है। उन्होंने मोदी सरकार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी लागू न करने का आरोप लगाया और कहा कि हाथियों का आतंक भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है।
राज्य संयुक्त सचिव असिम सरकार ने झारखंड में किसानों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और आंदोलन को और मजबूत करने की जरूरत बताई।
शिविर में झारखंड राज्य किसान कौंसिल सदस्य मदुवा कच्छप, अशोक शाह, परसुराम महतो, रघुवीर मंडल, शंकर उरांव, विसंबर महंतो, श्यामसुंदर महंतो, गंगाधर यादव, बारिक खान, शेख सईफुद्दीन, अनिल उरांव, सुरेंद्र राम, लखीराम मुर्मू, मिना देवी समेत अन्य नेताओं ने संबोधित किया।
शिक्षण शिविर में सीटू राज्य सचिव संजय पासवान और रमेश प्रजापति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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