खड़गपुर: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सतर्कता से बाल तस्करी का एक बड़ा प्रयास नाकाम हो गया। 25 अक्टूबर को शालीमार रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए छह नाबालिग लड़कों को अवैध श्रम और तस्करी से बचाया, जबकि चार वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
सुबह करीब 8:25 बजे, आरपीएफ को मिली सूचना के आधार पर टीम ने प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर फुटओवर ब्रिज के पास चार वयस्कों के साथ मौजूद छह नाबालिगों को देखा। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर टीम ने तुरंत घेराबंदी कर पूछताछ शुरू की।
जाँच में पता चला कि दो आरोपी मणिग्राम से ट्रेन नंबर 13178 (मालदा टाउन–सियालदह एक्सप्रेस) से दो नाबालिगों को लेकर बंडेल पहुँचे थे। वहीं, अन्य दो आरोपी पाकुड़ से ट्रेन नंबर 13054 (कुलिक एक्सप्रेस) से चार नाबालिगों को लेकर हावड़ा आए। दोनों समूह हावड़ा स्टेशन पर मिले और देर रात सड़क मार्ग से शालीमार स्टेशन पहुंचे, ताकि ओडिशा जाने वाली ट्रेनों में चोरी-छिपे सवार हो सकें।
पूछताछ में सामने आया कि बच्चों को 7,000 से 8,000 रुपये मासिक वेतन का लालच दिया गया था, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया था कि वे कहाँ काम करेंगे या किन परिस्थितियों में। चार नाबालिग पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और दो झारखंड के पाकुड़ जिले के रहने वाले थे।
आरपीएफ ने सभी छह बच्चों और चार आरोपियों को जीआरपी शालीमार थाना को सौंप दिया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच के दौरान आरपीएफ ने सात यात्रा टिकट भी ज़ब्त किए हैं।
दक्षिण पूर्व रेलवे ने कहा है कि वह बाल तस्करी और अवैध मज़दूरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे नेटवर्क में निरंतर निगरानी और अभियान जारी रहेगा।
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