खड़गपुर: कर्णगढ़ में आयोजित होने वाली प्राचीन दुर्गा पूजा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम और चुआड विद्रोह से भी जुड़ी हुई है। इस पूजा का आयोजन धारावाहिक ‘शोलक सारी’ की अभिनेत्री सुकन्या चक्रवर्ती के परिवार द्वारा किया जाता है। यह परिवार कर्णगढ़ के राजवंश और रानी शिरोमणि की परंपरा से जुड़ा है।
कर्णगढ़ के संस्थापक लक्ष्मण सिंह के वंशजों द्वारा स्थापित दंडेश्वर, खड़गेश्वर और महामाया मंदिर इस पूजा के केंद्र हैं। पूजा में अब मूर्ति की जगह घट और बर्तन का प्रयोग किया जाता है। पूजा का एक अनोखा हिस्सा है प्राचीन तलवार, जो इतिहास की गवाही देती है। देवाशीष चक्रवर्ती ने बताया कि महामाया मंदिर में पहले मूर्ति पूजा होती थी, लेकिन स्वप्न संदेश के बाद इसे बंद कर दिया गया और अब राजपरिवार के मंदिर के पास घट स्थापित कर पूजा की जाती है।
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इस पूजा से जुड़ा है शिवायन काव्य का निर्माण, जिसे कवि रामेश्वर भट्टाचार्य ने पुरोहित चंद्रचूड़ के निर्देश पर रचा था। चंद्रचूड़ और उनके भाई रुद्रचूड़ को राजा रघुनाथ लाए थे। इस काव्य और पूजा में स्थानीय इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपरा का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है।
चुआड विद्रोह के बाद राधारमण चक्रवर्ती ने ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके परिवार का योगदान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी रहा।
स्थानीय लोगों में इस पूजा के प्रति गहरी श्रद्धा है। यह पूजा कर्णगढ़ के राजवंश, स्वतंत्रता संग्राम और शिवायन काव्य की विरासत का प्रतीक है। निसर्ग निर्जस महतो ने कहा कि चक्रवर्ती परिवार के प्राचीन दस्तावेज ऐतिहासिक रूप से सटीक हैं।