चांडिल: सरायकेला जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में बनी चांडिल बहुउद्देशीय जल परियोजना को शुरू हुए 45 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इसके तहत विस्थापित हुए 116 गांवों के लोगों की समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं. ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत 84 मौजा के हजारों ग्रामीण आज भी न पुनर्वास की भूमि पा सके हैं, न स्थायी ठिकाना.
70 वर्षीया जोटली देवी की व्यथा
इन विस्थापितों में शामिल हैं 70 वर्षीय जोटली देवी, जो अपने हक के लिए चांडिल स्थित सुवर्णरेखा परियोजना अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय पहुंचीं. पहले उन्हें चावलीबसा पुनर्वास स्थल पर जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति ने उस भूमि पर कब्जा कर लिया. आज वे ईचागढ़ पंचायत भवन में शरण लिए हुए हैं, न्याय की आस में.
क्या है विस्थापितों का आरोप?
विस्थापितों का आरोप है कि पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 के एक अधिकारी द्वारा भूमि आवंटन के बदले रिश्वत की मांग की जा रही है. बिष्णु साव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में पुनर्वास कार्यालय में जमीन के लिए आवेदन दिया था, लेकिन आज तक उन्हें कोई सूचना या समाधान नहीं मिला. बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाने के बावजूद जवाब नहीं मिला, बल्कि एक व्यक्ति के माध्यम से पैसे की मांग की गई.
मांग क्या है?
विस्थापितों की सीधी और स्पष्ट मांग है —
उन्हें शीघ्र ही पुनर्वास के लिए वैध भूमि आवंटित की जाए
जिन लोगों की जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है, उन्हें वैकल्पिक भूखंड दिया जाए
पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और भ्रष्टाचार पर रोक लगे
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur: दो साल पहले हुई थी शादी संदेह में पति ने ब्लेड से काटा पत्नी का गला, नाले में फेंका शव