Bokaro: तानाशाही नीतियों के खिलाफ बोकारो स्टील प्लांट के मजदूरों का हल्ला बोल, चक्का जाम का ऐलान

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बोकारो:  देश के सबसे बड़े इस्पात संयंत्रों में गिने जाने वाले बोकारो स्टील प्लांट में मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रबंधन की “तानाशाही और मनमानी नीतियों” के खिलाफ मजदूरों ने सोमवार को ब्लास्ट फर्नेस जीएम ऑफिस के बाहर ज़बरदस्त प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ (हिंद मजदूर सभा से संबद्ध) के नेतृत्व में किया गया।

प्रबंधन पर तानाशाही का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संघ के महामंत्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि— मजदूरों के 39 महीने का एरियर अब तक अटका है।
इनसेंटिव-रिवॉर्ड स्कीम पुरानी और बेअसर है। क्षमता से अधिक उत्पादन का लक्ष्य देकर मजदूरों पर बोझ डाला जा रहा है, लेकिन इनाम की जगह आर्थिक दंड दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बोकारो के नाम पर विस्तार और आधुनिकीकरण के वादे सिर्फ कागज़ों में हैं, असल में बोकारो को बर्बाद किया जा रहा है।

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ठेका मजदूर सबसे ज्यादा पीड़ित
ठेका मजदूरों की हालत “गुलामी जैसी” बताई गई। इलाज और बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। मेडिकल चेकअप तो भर्ती से पहले कराया जाता है, लेकिन नौकरी के दौरान बीमार होने पर इलाज का इंतज़ाम नहीं होता। उन्हें ग्रेच्युटी, नाइट शिफ्ट भत्ता, शिक्षा व आवास जैसी मूल सुविधाएँ तक नहीं मिलतीं।

 

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सुरक्षा भगवान भरोसे
मजदूरों ने आरोप लगाया कि संयंत्र में सुरक्षा के नाम पर भारी लापरवाही है। हाल ही में कैपिटल रिपेयर में काम कर रहे मजदूर शिव योगी शर्मा की मौत ने सुरक्षा इंतज़ामों की पोल खोल दी। मजदूरों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, ऐसी दुर्घटनाएँ हर महीने हो रही हैं।

फर्नेस-5 में बार-बार तकनीकी खराबी आ रही है, लेकिन मेन्टेनेन्स सिर्फ “ऊपरी कामचलाऊ तरीके” से हो रहा है। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारी मिलकर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

राजेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा— “अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है। अगर हमारी मांगों पर 5 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई, तो मजदूर चक्का जाम करेंगे। इस बार आंदोलन आर-पार का होगा।”

प्रदर्शन में कई नेताओं ने भी मजदूरों की मांगों का समर्थन किया। इनमें आर.के. सिंह, शशिभूषण, सुभाष कुंभकार, विपिन कुमार सिंह, संतोष कुमार, अरविंद कुमार, इरफान, संतोष कर्मकार समेत दर्जनों नाम शामिल रहे।

 

 

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