
जादूगोड़ा: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) डॉ. संतोष कुमार सतपति पर एक महिला अधिकारी द्वारा लगाए गए हालिया आरोपों ने पूरे संगठन में हलचल मचा दी है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि यह आरोप एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद एक ईमानदार और कुशल वैज्ञानिक को बदनाम करना है।
यूसीआईएल के कई अधिकारियों ने बताया कि डॉ. सतपति ने वर्षों से जमे भ्रष्ट और अयोग्य अधिकारियों के तबादले का साहसिक निर्णय लिया था। उन्हीं में से कुछ ने अब उन्हें झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की है। कर्मचारियों का मानना है कि यह मामला व्यक्तिगत स्वार्थों से प्रेरित है और इसका उद्देश्य उनके प्रशासनिक फैसलों को रोकना था।
कर्मचारियों ने इस मामले की तुलना उस घटना से की, जब एक इसरो वैज्ञानिक पर झूठे आरोप लगाए गए थे जो बाद में पूरी तरह बेबुनियाद साबित हुए। उनका कहना है कि ऐसे आरोप वैज्ञानिक समुदाय का मनोबल गिराते हैं और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को कमजोर करते हैं।
डॉ. सतपति को एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और संगठनात्मक सुधारक के रूप में जाना जाता है। उनके कार्यकाल में टेलिंग पॉन्ड के कचरे से ईंट निर्माण जैसी परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया, जो न केवल यूसीआईएल बल्कि पूरी डीएई प्रणाली के लिए मील का पत्थर है। युवा कर्मचारियों के लिए वे एक रोल मॉडल माने जाते हैं।
संगठन में कार्यरत महिलाओं का कहना है कि डॉ. सतपति के नेतृत्व में महिला सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने इंटरनल कंप्लेंट कमिटी (ICC) को अधिक सशक्त और स्वतंत्र बनाया, ताकि महिलाएं निडर होकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकें।
सूत्रों का दावा है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं है, इसके पीछे कुछ राजनीतिक और उच्चस्तरीय प्रशासनिक हित भी जुड़े हो सकते हैं। कुछ अधिकारी जो लंबे समय से एक ही पद पर जमे हुए थे और जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे, वे अब इस तरह की चालें चल रहे हैं।
यूसीआईएल के दर्जनों कर्मचारी, अधिकारी और पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सतपति के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। उनका कहना है कि जांच जरूर हो, लेकिन पूरी पारदर्शिता के साथ। साथ ही आरोप लगाने वाली अधिकारी की पृष्ठभूमि और मंशा की भी जांच होनी चाहिए, ताकि किसी राष्ट्रसेवी वैज्ञानिक की छवि को नाजायज़ तरीके से खराब न किया जाए।
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