गुवा: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन, मेघाहातुबुरु और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालु महिलाओं ने विधि-विधान के साथ मां स्कंद माता की पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाएं स्नान और व्रत कर पूजा में शामिल हुईं। गुवा से मनोहरपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित वन देवी मंदिर और राम नगर पूजा पंडाल में भक्तों का तांता लगा रहा।
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पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और देवी गीतों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और संतान की लंबी उम्र के लिए मां से आशीर्वाद मांगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंद माता भगवान कार्तिकेय को गोद में लेकर विराजमान रहती हैं, इसलिए उनकी उपासना संतान सुख, यश और आरोग्य प्रदान करती है। दिनभर उपवास और हवन के साथ आरती और मंत्रोच्चारण चलता रहा।
डांडिया नाइट में रंगारंग उत्सव
उसी दिन शाम को प्रगति महिला समिति, मेघाहातुबुरु ने सामुदायिक भवन प्रांगण में डांडिया नाइट का आयोजन किया। कार्यक्रम पारंपरिक वेशभूषा, गरबा और डांडिया की थाप, तथा भक्तिमय गीतों से सजा हुआ था। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें मुख्य अतिथि और महिला समिति की अध्यक्ष स्टेला सेलवम ने दीप जलाकर उद्घाटन किया।
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कार्यक्रम में सुनीता सिंह, सुनीता थापा, सुषमा योगेश राम, पिंकी मनोज, रंजना प्रमोद, अंजू बासु, तोपती बर्मन, मुखिया लिपि मुंडा सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। दीप की रोशनी ने माहौल को पवित्रता और श्रद्धा से भर दिया।
रंगारंग प्रस्तुतियों और सामुदायिक उमंग
मंच पर डांडिया और गरबा की धुनों पर महिलाओं और युवतियों ने विभिन्न समूहों में नृत्य प्रस्तुत किया। पारंपरिक परिधान में सजी महिलाएं चक्राकार घूमते हुए डांडिया की लय पर थिरक उठीं, जिससे दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
कार्यक्रम रात गहराने तक चलता रहा, और सामुदायिक भवन प्रांगण में संगीत, रंग और ऊर्जा का अद्भुत संगम देखा गया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों और जयकारों की गूंज वातावरण को और उत्साही बनाती रही।
उपस्थिति और सहयोग
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चियां उपस्थित रहीं, जिनमें सुमन मुंडू, तिलोत्तमा महतो, उषा रजक, सुजाता केशरी, शशि सिंकू, माधवी महतो, एल साहू, मेघा, कुसुम, रुचुस्मिता, सोमा सरकार, अमिता बारी, इशिका, मीनू महतो, पिंकी गुप्ता, पुर्णिमा, मोनिका सरकार और सूर्यमणि पूर्ति प्रमुख रूप से शामिल थीं। सभी ने मिलकर नवरात्रि उत्सव को जीवंत और उल्लासपूर्ण बनाया।