जमशेदपुर: जमशेदपुर के परसुडीह स्थित सदर अस्पताल एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार को पोटका के 15 वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित किशोर को उसके परिजनों ने इलाज के लिए अस्पताल लाया। परिजनों के अनुसार, बच्चा देर रात से बेसुध था और उन्हें उम्मीद थी कि अस्पताल में तुरंत इलाज शुरू होगा।
हालांकि, सदर अस्पताल के सुपरवाइजर निशांत पांडेय ने परिजनों की सुनवाई किए बिना ही बच्चे को एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन बार-बार गुहार लगाते रहे कि पहले बच्चे की हालत को स्थिर किया जाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
एमजीएम अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति देख तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया। लेकिन दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी, इसलिए परिजनों को बाहर से दवा लेने के लिए पर्ची दी गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ने जान-पहचान वालों से उधार लेकर दवा खरीदी और बच्चे को दी।
एमजीएम में एक्स-रे और कुछ अन्य जांच की गई, लेकिन सिटी स्कैन नहीं हो पाया क्योंकि इसके लिए बच्चे को पुराने अस्पताल स्थित जांच केंद्र भेजना पड़ा। इससे परिजन और परेशान हो उठे।
मामले की जानकारी मिलने पर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दिवाकर हांसदा ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके मंधान को बच्चे की देखभाल के स्पष्ट निर्देश दिए। डॉ. हांसदा ने बताया कि किशोर एमजीएम के इमरजेंसी बेड नंबर 15 पर इलाजरत है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
इस लापरवाही पर परिजन गहरे नाराज हैं। उनका सवाल है कि जब सदर अस्पताल को राज्य का नंबर वन अस्पताल घोषित किया गया है, तो मरीजों को बिना इलाज एमजीएम क्यों भेजा जा रहा है।
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