सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में शनिवार को संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन की ओर से कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। आदिवासी महिला-पुरुषों ने पारंपरिक हथियारों के साथ नीमडीह प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ कुमार एस. अभिनव को मांग पत्र सौंपा।
संगठन की ओर से दिए गए पत्र में कहा गया है कि कुड़मी/कुरमी महतो जाति मूल रूप से एक कृषक समुदाय है, जिसकी भाषा, संस्कृति, पूजा-पद्धति और रहन-सहन आदिवासी जनजातियों से भिन्न है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि झारखंड सरकार ने 8 दिसंबर 2004 और 6 जनवरी 2005 को टीआरआई (Tribal Research Institute) के माध्यम से कुड़मी/कुरमी समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन 10 फरवरी 2015 की नृवंशविज्ञान रिपोर्ट में यह साफ कहा गया कि कुड़मी/कुरमी समुदाय कुनबी की उपजाति है और इसमें अनुसूचित जनजाति के अनिवार्य मापदंडों का अभाव है।
संगठन के सदस्यों ने कहा कि कुड़मी समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने से वास्तविक आदिवासी समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से और अधिक पिछड़ जाएगा। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव को अस्वीकार करने की मांग की और कहा कि यह निर्णय आदिवासी अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था के साथ अन्याय होगा।
आदिवासी समुदाय ने अपने अलग सरना धर्म कोड को मान्यता देने और पेशा एक्ट, 1996 को झारखंड में लागू करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति पूजक रहा है, इसलिए सरना धर्म कोड को सरकारी स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए।
प्रदर्शन में डोमन सिंह, श्यामल मार्गी, सुरेन्द्र सिंह, भोला सिंह, लक्ष्मण सिंह, अजय सिंह, बरूण सिंह, असित सिंह पातर सहित कई आदिवासी महिला-पुरुष शामिल हुए। सभी ने कुड़मी को एसटी सूची में शामिल नहीं करने की मांग पर नारे लगाए और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
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