बिष्टुपुर में जालंधर वध और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की कथा का वर्णन
जमशेदपुर : शिव महापुराण में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन अत्यंत पावन और कल्याणकारी है, जो शिव के ज्योति स्वरूप का प्रतिपादन करते हैं। ज्ञानसंहिता में शिवजी ने स्वयं इन बारह स्थानों को अपने प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्वरूप बताया है, जहाँ दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह कथा भक्तों को शिव के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति का संदेश देती है। ये बातें बिष्टुपुर सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में चल रहे शिव महापुराण कथा के पाचवें दिन शनिवार को कथावाचक स्वामी सूदर्शनाचार्य महाराज ने जालंधर वध, द्धादश ज्योतिर्लिग वर्णन कथा का प्रसंग सुनाते हुए कही

कथावाचक ने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम का सुबह-शाम स्मरण करने मात्र से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह प्रसंग शिव के कल्याणकारी, ज्ञानप्रद और मोक्षदाता स्वरूप को दर्शाता है, जो ज्ञानसंहिता और धर्मसंहिता में विस्तार से वर्णित है। उन्होंने जालंधर वध कथा का वर्णन करतेे हुए बताया कि समुद्र और अग्नि के संयोग से जन्मा असुरराज जालंधर अपनी पत्नी वृंदा के पतिव्रत धर्म के कारण अजेय था। उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और माता पार्वती को पाने की इच्छा से शिव से युद्ध किया। अंत में, भगवान विष्णु द्वारा जालंधर का रूप धारण कर वृंदा का पतिव्रत भंग करने पर शिव ने जालंधर का वध किया। पति की मृत्यु के बाद वृंदा ने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) बनने का श्राप दिया और सती हो गई, जिसकी राख से वहां तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। इस प्रकार जालंधर का वध अहंकार के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। छठवें दिन रविवार को कथावाचक बाणासुर, अंधकासुर, भस्मासुर कथा का प्रसंग सुनाएगें। सातवें दिन सोमवार को पंचाक्षर महिमा का पर्णन और हवन पूर्णाहूति के साथ कथा का विश्राम होगा। मुख्य यजमान पुष्पा देवी-रामा कांत साह और अंचल-मनीष कश्यप थे। आज भी सुबह 7 से 10 बजे तक संस्था से जुड़े 11 जोड़ो ने पूजा करायी। रोजाना की तरह आज भी दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक काफी संख्या में भक्तगण शामिल होकर कथा का आनन्द लिये। इसका आयोजन धार्मिक संस्था मित्र कांवड संघ टाटानगर द्धारा किया जा रहा हैं।















































