25 अक्टूबर को चाईबासा में होगा क्षेत्रीय भाषा एवं पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर विचार-मंथन
चाईबासा (सिद्धार्थ पाण्डेय) : मानकी-मुंडा संघ, कोल्हान-पोड़ाहाट केंद्रीय समिति, चाईबासा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को परिसदन में जगन्नाथपुर के विधायक, सत्तारूढ़ दल के उप मुख्य सचेतक सह कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोनाराम सिंकु से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आगामी 25 अक्टूबर 2026 को चाईबासा में आयोजित होने वाले क्षेत्रीय भाषा एवं पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था संबंधी एकदिवसीय कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए विधायक को औपचारिक आमंत्रण पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने विधायक सोनाराम सिंकु को कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों से अवगत कराते हुए बताया कि मानकी-मुंडा संघ, कोल्हान-पोड़ाहाट केंद्रीय समिति के तत्वावधान में 25 अक्टूबर को पूर्वाह्न 10 बजे से कोल्हान विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल, चाईबासा में एकदिवसीय कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों तथा जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की प्रासंगिकता एवं जनजातीय समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कोल्हान की ऐतिहासिक मानकी-मुंडा स्वशासन व्यवस्था, जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान तथा क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर कार्यक्रम में विशेष चर्चा की जाएगी। इसके माध्यम से पारंपरिक व्यवस्था एवं आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। विधायक सोनाराम सिंकु ने प्रतिनिधिमंडल से कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि कोल्हान की पारंपरिक मानकी-मुंडा स्वशासन व्यवस्था इस क्षेत्र की ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्रीय भाषाओं, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक स्वशासन संस्थाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सार्थक संवाद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों, पारंपरिक नेतृत्व एवं जनप्रतिनिधियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिलता है।विधायक ने कहा कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से समझना तथा उनके संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास करना आवश्यक है।प्रतिनिधिमंडल में मानकी-मुंडा संघ के महासचिव मुंडा सोना सुलेमान हांसदा, उपाध्यक्ष मुंडा साधु चरण जोंको, पूर्व उपाध्यक्ष मानकी कृष्णा सामड, पूर्व उपाध्यक्ष मुंडा सनातन सिदू तथा झींकपानी अंचल अध्यक्ष मुंडा जगदीश आल्डा शामिल थे।
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