पटना: कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाने वाला छठ पर्व लोक आस्था का महापर्व है। चतुर्थी तिथि के दिन नहाय-खाय के साथ इस पर्व की शुरुआत होती है और यह चार दिनों तक चलता है। इस दौरान महिलाएं व्रत रखकर सूर्य देव और छठी माई से संतान सुख, परिवार की समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं।
सूर्योपासना का धार्मिक महत्व
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार सूर्य देवता को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि सूर्य को बिना अर्घ्य दिए भोजन करना भी पाप के समान है।
भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने सूर्य को जगत का सृजनकर्ता बताया है — जिनसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश की उत्पत्ति हुई। छठ पर्व इसी सूर्योपासना का जीवंत प्रतीक है।
अर्घ्य देने की परंपरा और मान्यता
छठ पूजा के तीसरे दिन शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जबकि अगले दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति को तुरंत मनचाहा फल मिलता है, वहीं उगते सूर्य की उपासना से जीवन में आरोग्य, यश और समृद्धि का संचार होता है।
त्रिदेव स्वरूप माने गए सूर्य देव
शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव दिन के तीन अलग-अलग स्वरूपों में पूजे जाते हैं — उदयकाल में ब्रह्मा, दोपहर में विष्णु और संध्याकाल में शिव।
इसलिए सूर्य की उपासना त्रिदेव की आराधना मानी जाती है।
स्वास्थ्य, समृद्धि और संतान सुख का पर्व
सुबह सूर्य की आराधना स्वास्थ्य प्रदान करती है, दोपहर में की गई उपासना यश और कीर्ति देती है, जबकि शाम की उपासना सम्पन्नता और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है। छठ पर्व को जीवन में तेज, ऊर्जा, सफलता और शांति का पर्व भी कहा जाता है।
छठ पूजा 2025 Start Date:
पहला दिन – नहाय खाय: 25 अक्टूबर 2025, शनिवार
छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती पवित्र नदी या तालाब में स्नान करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन में आमतौर पर चावल, दाल, कद्दू की सब्जी शामिल होती है। इस दिन से ही पवित्रता और संयम का पालन शुरू हो जाता है।
दूसरा दिन – खरना छठ पूजा: 26 अक्टूबर 2025, रविवार
खरना के दिन व्रती पूरा दिन निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद तैयार करके पहले छठी मैया को अर्पित करते हैं, फिर परिवार में बांटते हैं। इसके बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: 27 अक्टूबर 2025, सोमवार
यह छठ पूजा का मुख्य दिन होता है। षष्ठी तिथि की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को सुबह 06:04 बजे से होगी और समाप्ति 28 अक्टूबर 2025 को सुबह 07:59 बजे होगी। शाम को लगभग 05:40 बजे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती घुटनों तक पानी में खड़े होकर बांस की सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना और अन्य प्रसाद रखकर सूर्य देव को अर्पित करते हैं।
चौथा दिन – उषा अर्घ्य और पारण (सप्तमी तिथि): 28 अक्टूबर 2025, मंगलवार
छठ पूजा का अंतिम दिन उषा अर्घ्य का होता है। सुबह लगभग 06:30 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण करते हैं और प्रसाद ग्रहण कर पारण करते हैं।















































