
गुवा : 8 सितंबर 1980 के गुवा गोलीकांड की याद में इस बार भी गुवा शहीद दिवस बड़े स्तर पर मनाया जाएगा। इसकी तैयारी जोरों पर है। झामुमो कार्यकर्ता शहीद स्मारक स्थल की साफ-सफाई और रंग-रोगन में जुटे हैं।
8 सितंबर 1980 को गुवा बाजार में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए टकराव में गोली चली थी। इसमें 11 आदिवासियों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। उस समय ग्रामीण जंगल कटाई, लाल पानी से खेतों की बर्बादी और फर्जी मुकदमों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे।
पुलिस और बीएमपी जवानों के साथ हुई झड़प में दोनों ओर से गोलीबारी हुई। पांच जवान शहीद हुए और दर्जनों ग्रामीण मारे गए या घायल हुए। इस घटना ने पूरे सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में आक्रोश की लहर पैदा कर दी।
गोलीकांड में शहीद हुए आदिवासियों में रामो लागुरी, चानदो लाफरी, रेन्गों सुरीन, बागी देवगम, जीतू सुरीन, चैतन्य चाम्पिया, चूड़ी हांसदा, जूरा पूर्ती और गोंदा होनाहगा शामिल थे। झामुमो कार्यकर्ता हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं।
झामुमो नेता और सांसद सलाहकार मो. तबारक खान ने बताया कि इस बार शहीद दिवस वृहद रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ गुवा पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।
युवा नेता मो. तौकीफ ने कहा कि शहीदों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि झारखंड आंदोलन की असली विरासत जीवित रह सके।
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