जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन गुरूवार को कथावाचक स्वामी सूदर्शनाचार्य महाराज ने सती चरित्र, पार्वती जन्म, शिव विवाह उत्सव कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए कहा कि आज की यह कथा प्रेम, तपस्या और भक्ति का प्रतीक है। कहा कि सच्चा प्रेम और दृढ़ संकल्प किसी भी बाधा को पार कर सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। शिव और पार्वती का मिलन केवल एक विवाह नहीं था, बल्कि यह एकीकरण था – शक्ति (पार्वती) और चेतना (शिव) का, जो सृष्टि के संतुलन के लिए आवश्यक था। शिव-पार्वती विवाह का सचित्र प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि विवाह संस्कार पवित्र संस्कार है लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है।

जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। यह प्रसंग अटूट प्रेम, तपस्या, और ईश्वर को पाने के लिए समर्पण का संदेश देता है। मान्यता है कि इस कथा के श्रवण से वैवाहिक जीवन में शांति और सुख आता है। कथा में भूतों की टोली के साथ नाचते गाते हुए शिव जी की बरात आई। बरात का भक्तों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। शिव पार्वती की सचित्र झांकी सजाई गई। विधि विधान पूर्वक विवाह संपन्न हुआ महिलाओं ने नृत्य करते हुए मंगल गीत गाए और विवाह की रस्म पूरी हुई।
चौथे दिन शुक्रवार को कथावाचक कार्तिक, गणेश उत्पति, तारकासुर मोक्ष, राजासूर कथा, दुर्वासा एवं हनुमान अवतार कथा का प्रसंग सुनाएगें। मुख्य यजमान पुष्पा देवी-रामा कांत साह और अंचल-मनीष कश्यप थे। सुबह 7 से 10 बजे तक संस्था से जुड़े 11 जोड़ो ने पूजा करायी। इस मौके पर राम पसाद शर्मा, मनीष शर्मा, रवि पटेल, अमित शर्मा, संदीप बरवालिया, अजीत प्रसाद, राजेन्द्र सोनकर, गौरव अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल सहित काफी संख्या में भक्तगण शामिल थे। इसका आयोजन धार्मिक संस्था मित्र कांवड संघ टाटानगर द्धारा किया जा रहा हैं। शिवकथा का प्रवचन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक हो रहा हैं।
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