जमशेदपुर : आदिवासी समाज का महापर्व सरहुल पूरे उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। सीतारामडेरा उरांव बस्ती में उरांव समाज द्वारा सखुआ पेड़ के समीप विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही पेड़, पहाड़ और जल की पूजा कर प्रकृति के प्रति आस्था प्रकट की गई। आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जिसमें नौ सुहागिन महिलाएं सिर पर कलश लेकर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगी। इस अवसर पर फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षि़त के प्रशंसक समाजसेवी पप्पू सरदार भी आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु शामिल हुए और शोभायात्रा में भाग लेने वाली महिलाओं को पारंपरिक साड़ियां और सुहाग के सामान भेंट कीं। केंद्रीय सरहुल पूजा समिति, पूर्वी सिंहभूम के लाइसेंसी सुखराम लकड़ा ने बताया कि सरहुल पर्व की शुरुआत होली से ही हो जाती है। इस दौरान सरहुल के फूल और पत्तों को चाला मंडप में अर्पित किया जाता है। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पाहन द्वारा विशेष पूजा की जाती है, जिसमें सूर्य और धरती के विवाह का प्रतीकात्मक अनुष्ठान होता है।



















































