नई दिल्ली: सनातन धर्म में कार्तिक पूर्णिमा को अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसी दिन देव दिवाली भी मनाई जाती है, जब माना जाता है कि देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर गंगा तटों पर दीप जलाते हैं।
कब है कार्तिक पूर्णिमा 2025
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि मंगलवार, 4 नवंबर 2025 की रात 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर बुधवार, 5 नवंबर को शाम 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। परंपरानुसार उदया तिथि को ही प्रमुख माना जाता है, इसलिए कार्तिक पूर्णिमा 2025 बुधवार, 5 नवंबर को मनाई जाएगी।
स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दान-पुण्य का शुभ समय बुधवार को भोर 4:52 से 5:44 बजे तक रहेगा।
इस समय में गंगा स्नान करने के बाद जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, तिल, घी या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
स्नान-दान के बाद पूजा का मुहूर्त सुबह 7:58 से 9:20 बजे तक और शाम को प्रदोष काल में 5:15 से 7:05 बजे तक रहेगा।
पूजा-व्रत और दीपदान की परंपरा
इस दिन गंगाजल का छिड़काव, दीपदान और व्रत-उपवास करने की प्रथा है। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान गणेश, शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी और श्री सत्यनारायण स्वामी की विधिवत पूजा की जाती है। घर के मुख्य द्वारों पर दीपक जलाने के साथ ही एक दीपक तुलसी के पास, एक पूजा घर में, एक जल स्रोत के पास और एक उत्तर दिशा की ओर जलाना शुभ माना गया है।
धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन किए गए स्नान, दान और पूजा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा गया है कि सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करने से कई जन्मों के दोष दूर होते हैं और दीन-दुखियों की सहायता करने से जीवन में कल्याण आता है।















































