- मजदूरों की समस्याओं पर अब तक नहीं हुआ गंभीर मंथन
बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट, जिसे देश के लौह इस्पात उत्पादन का गौरव माना जाता है, आज खुद अस्तित्व और विकास के संकट से गुजर रहा है। विस्थापित परिवारों की समस्या, ठेका मजदूरों का शोषण, मजदूरी दरों की अनदेखी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, यूनियन चुनावों में गड़बड़ी और सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे पड़े हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि बोकारो स्टील प्लांट का निर्माण 1964 में होने के बावजूद 61 वर्षों के बाद भी यहां के मजदूरों और आसपास के लोगों का जीवन स्तर बेहतर नहीं हो पाया है। नेताओं, यूनियन प्रतिनिधियों और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन मजदूरों की समस्याओं पर ठोस समाधान नहीं निकाला गया।
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भ्रष्टाचार और ठेकेदारों की मिलीभगत से बिगड़ी स्थिति
प्लांट में मजदूरों के शोषण का सबसे बड़ा कारण अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत बताई जाती है। मजदूरों को सीएलसी रेट के अनुसार मजदूरी मिलना तो दूर, गेट पास तक के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। यदि कोई मजदूर अपने अधिकारों की मांग करता है तो ठेकेदार और अधिकारी मिलकर उसका पास छीन लेते हैं। मजदूरों की दुर्दशा यह है कि उन्हें पापी पेट और परिवार के लिए समझौता करना पड़ता है। नियोजन के नाम पर छंटनी जारी है और मजदूरों को लगातार असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। मजदूर हितों को देखने वाला विभाग भी आंखें मूंदे बैठा है और ठेकेदारों के संरक्षण में भ्रष्टाचार चरम पर है।
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आंदोलन और वार्ता में नहीं निकलता समाधान
मजदूरों द्वारा समय-समय पर किए गए आंदोलनों का नतीजा अक्सर निराशाजनक रहा है। नेताओं और यूनियन प्रतिनिधियों पर आरोप है कि वे केवल अपने राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदे के लिए आंदोलन करते हैं, लेकिन मजदूरों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। जिला प्रशासन और प्लांट प्रबंधन के बीच होने वाली बैठकों का कोई सार्थक निष्कर्ष सामने नहीं आता। नतीजा यह है कि मजदूरों की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं और बोकारो जिले के लोग विकास से कोसों दूर रह जाते हैं। जबकि मजदूर उत्पादन में कोई कमी नहीं आने देते, फिर भी उनका जीवन नारकीय स्थिति में बीत रहा है।
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केंद्र और राज्य सरकार से ठोस पहल की मांग
विशेषज्ञों और मजदूर संगठनों का मानना है कि अब जरूरत है एकजुट होकर बड़े आंदोलन की, ताकि बोकारो स्टील प्लांट की वास्तविक समस्याओं का हल निकल सके। यदि भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर रोक नहीं लगी, तो यह प्लांट अंदर ही अंदर खोखला होता चला जाएगा। मजदूरों का जीवन स्तर सुधारने और प्लांट को फिर से विकास की राह पर लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई कर पारदर्शिता लाना अनिवार्य है। तभी बोकारो स्टील प्लांट का विकास और बोकारो जिले के लोगों का समग्र उत्थान संभव हो सकेगा।















































