दीपक कुमार
जमशेदपुर : रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार भारत से निकलकर विदेशों तक में मनाया जाने लगा है। चूंकि भारतीय विदेशों में भी बहुतायत मात्रा में निवास करते हैं ऐसे में वो अपनी परंपरा को भूले नहीं हैं। जो अच्छी बात है। सदियों से भारत देश में रक्षाबंधन का त्योहार मूलतः भाई – बहन के बीच का त्योहार माना जाता रहा है। परंतु अलग-अलग प्रदेशों में रक्षाबंधन का त्योहार भिन्न-भिन्न तरीके से मनाया जाता है। उत्तर भारत में जहां बहने भाईयों के कलाईयों पर राखी बांधती है। वहीं भाई बदले में बहन को उपहार आदि देते हैंं तथा उसकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। जानकार बताते हैं कि समाज में यह व्यवस्था बड़ी सोच समझकर पूर्वजों ने बनाई है। ऐसा इसलिए कि भाई बहन का संबंध बहनों के विवाहों उपरांत भी भाई से बना रहें। वहीं भाईयों को बहनों के प्रति जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। साल में एक बार श्रावण मास में मनाया जाने वाला यह त्योहार जहां भाई – बहनों के अटूट रिश्तों को बयां करती है वहीं हर भारतीय को परंपरा के तहत जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। जिन बहनों के भाई दूर दराज रहते हैं उन्हें बहनें विभिन्न माध्यमों से राखी भेजकर परंपरा को निभाती रहीं हैं। भारतीय डाक विभाग भी बहनों के रक्षाबंधन त्योहार को सार्थक और सफल करने के लिए विशेष रूप में तैयारी करती है।

मान्यता के तहत महाराष्ट्र में मछुआरे समुंद्र देवता को नारियल अर्पित कर रक्षा बंधन का त्योहार मनाते हैं। वहीं दक्षिण भारत में ब्राह्मणों द्वारा लोगों को रक्षासूत्र बांधने का प्रचलन है। कई जगहों पर बहनें भाईयों के संग भाभियों को भी रक्षा सूत्र बांधतीं है। मारवाड़ी बहनों द्वारा लूंबा राखी बांधने का प्रचलन है।

वहीं जमशेदपुर जैसे शहर में जहां विभिन्न प्रांतों के लोग रहते हैं । यहां अनूठे अंदाज में लोगों को राखी का त्योहार मनाते देखा गया है। यहां बहनें जहां सरहद की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिक भाईयों के कलाईयों पर सामूहिक रूप से राखियां बांधती है । वहीं कईयों ने जिनकी अपनी बहनें नहीं है वो पड़ोस की परिचित बहनों से राखी बंधवाएं।
उधर प्रकृति के प्रति रक्षा की वचनबद्धता दोहराते हुए पेड़ों को रक्षासूत्र बांधकर भी राखी का त्योहार मनाया गया। वहीं जोजोबेड़ा क्षेत्र में गौ रक्षा का संकल्प के साथ गायों को रक्षा सूत्र बांधकर , रक्षा के संकल्प के साथ यह त्योहार मनाया गया। उधर टेल्को क्षेत्र में एक ऐसे खास शख्स है जो 50 वर्षों से बहनों द्वारा कलाई पर बांधी गई हरेक राखियों को आज भी सहेजकर रखें हैं।
कुल मिलाकर भावनात्मक लगाव हर उस प्रिय और कीमती चीजों की रक्षा का संकल्प लेने वाला रक्षाबंधन का त्योहार न सिर्फ भाई बहनों तक सीमित रहा बल्कि इसका स्वरूप वृहद होता गया है।




















































