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पोटका: पोटका प्रखंड अंतर्गत कुटसूरी गांव में नौ महाल और स्थानीय भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. यह बैठक हाल ही में समाज के परंपरागत “उकशासन” स्थल में ठेकेदार द्वारा की गई छेड़छाड़ को लेकर बुलाई गई थी. “उकशासन” भूमिज समाज की वह परंपरा है, जहाँ किसी व्यक्ति के निधन के पश्चात उनकी अस्थियाँ विशिष्ट विधि से भूमि में दफनाई जाती हैं. यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि सामाजिक अस्मिता का भी प्रतीक है.
ठेकेदार की गैरहाज़िरी से और भड़की भावनाएँ
बैठक में ठेकेदार को उपस्थित होने का आग्रह किया गया था, परंतु वह नहीं पहुंचा. इससे समुदाय के बीच असंतोष और गहराया. समाज के लोगों ने निर्णय लिया कि अगली बैठक में भी यदि ठेकेदार अनुपस्थित रहता है, तो “उकशासन” की विधिपूर्वक शुद्धि कर चेतावनी जारी की जाएगी.
“अस्मिता पर बुलडोजर बर्दाश्त नहीं” – सिद्धेश्वर सरदार
भूमिज समाज के सलाहकार सदस्य सिद्धेश्वर सरदार ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा,
“विकास तो आवश्यक है, लेकिन हमारी पहचान और परंपरा पर बुलडोजर चलाना स्वीकार्य नहीं. कोई भी हमारी अस्मिता को ठेस नहीं पहुंचा सकता. अगर किसी ने ऐसा किया, तो उसका विरोध हर स्तर पर होगा.”
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को विकास योजनाओं में स्थानीय परंपराओं और सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए.
भारी संख्या में शामिल हुए समाज के लोग
बैठक में भूमिज समाज के वरिष्ठ एवं सम्मानित सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. इनमें प्रमुख रूप से सलाहकार समिति के सिद्धेश्वर सरदार, अध्यक्ष जयपाल सिंह सरदार, मानिक सरदार, श्रीपति सरदार, गणेश सरदार, मानसिंह सरदार, दुबराज सरदार, देव सोरी सरदार, बीरो सरदार, अंजलि सरदार, सत्यवती सरदार, रतीलाल सरदार, महेश्वर सरदार, हरिपद सरदार, राजेश सरदार, बालेश्वर सरदार और बसंती सरदार शामिल थे.
सभी ने एक स्वर में निर्णय लिया कि सामाजिक अस्मिता और परंपरा की रक्षा के लिए संगठित प्रयास ज़रूरी हैं और कोई भी बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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