रांची: हिंदू धर्म में हर पर्व का खास महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज व्रत इस बार 26 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार तृतीया तिथि 25 अगस्त दोपहर 12:35 से शुरू होकर 26 अगस्त दोपहर 1:55 पर समाप्त होगी। उदया तिथि के हिसाब से व्रत 26 अगस्त को ही मान्य होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:56 से 8:31 बजे तक रहेगा। करीब ढाई घंटे तक किए गए पूजन से विशेष फल प्राप्त होगा। इस बार महालक्ष्मी राजयोग, हस्त नक्षत्र और शुभ योग जैसे कई संयोग बन रहे हैं, जिससे व्रत का महत्व और बढ़ जाएगा।
व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि हरतालिका तीज का व्रत करने से पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति मिलती है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है। माता पार्वती को 16 श्रृंगार अर्पित करना शुभ माना जाता है।
व्रत और पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। शिव-पार्वती को भोग अर्पित कर मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन और वैवाहिक जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
रात्रि जागरण की परंपरा
कहानी के अनुसार, मां पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले यह व्रत किया था। उन्होंने वर्षों कठिन तपस्या की थी। इसलिए इस दिन चारों प्रहर में शिव जी का पूजन और रातभर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है। माना जाता है कि रात्रि जागरण से व्रत सफल होता है।
हरतालिका तीज का महामंत्र
विवाह संबंधी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यह मंत्र 11 माला जाप करना चाहिए:
“हे गौरीशंकर अर्धांगी यथा त्वां शंकर प्रिया।
तथा माम कुरु कल्याणी, कान्तकांता सुदुर्लभाम।।“
इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से, संपूर्ण श्रृंगार के साथ और खासकर शाम के समय करना श्रेष्ठ माना गया है।
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