Gua : सारंडा सेंचुरी पर ग्रामीणों की गूंज: रोवांम फुटबॉल मैदान में आम सभा, तीर-धनुष उठाकर आदिवासियों ने जताया विरोध

  • मंत्री दीपक बिरुवा बोले – ग्रामीणों की भावनाओं को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाएगी सरकार, 2500 ग्रामीणों की उपस्थिति

गुवा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा प्रखंड स्थित रोवांम फुटबॉल मैदान में झारखंड सरकार की ओर से आयोजित आम सभा में सारंडा सेंचुरी के प्रस्ताव का जोरदार विरोध देखने को मिला। इस सभा में लगभग 2500 ग्रामीणों की उपस्थिति रही, जो तीन घंटे तक मैदान में डटे रहे। सर्वोच्च न्यायालय में 8 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई से पहले ग्रामीणों की राय और भावनाओं को संकलित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा ने की और उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि ग्रामीणों की राय सीधे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाई जाए।

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सारंडा डीएफओ ने स्पष्ट किया आम सभा का उद्देश्य, सर्वोच्च न्यायालय में रखी जाएगी ग्रामीणों की राय

सभा में विभिन्न गांवों से आए प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। मानकी सारंडा पीढ़ लगुड़ा देवगम ने कहा कि यदि सेंचुरी बनाई जाती है तो पहले ग्रामीणों के संरक्षण और विकास की गारंटी सुनिश्चित करनी होगी। रोवांम गांव के रामो सिद्धू ने कहा कि खदानों ने जंगल और नदी-नालों को तो नष्ट किया है, लेकिन रोजगार नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी ही वास्तविक रूप से जल, जंगल और जमीन के संरक्षक हैं, इसलिए सेंचुरी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। पंचायत समिति सदस्य रामेश्वर चांपिया ने भी ग्रामसभा की अनुमति के बिना सेंचुरी घोषित करने का विरोध किया।

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खदानों से जंगल-नदी बर्बाद, पर रोजगार नहीं – ग्रामीणों ने जताया विरोध

सभा में कई ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि सेंचुरी बनने से उनकी परंपरा और आजीविका पर सीधा प्रहार होगा। अमर सिंह सिद्धू ने कहा कि सारंडा की आदिवासी परंपरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, वहीं रोवांम और आसपास के कई ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामसभा से चर्चा किए बिना यह निर्णय थोपना स्वीकार्य नहीं है। बुंडू गांव के कृष्णा टोपनो ने कहा कि सेंचुरी आने वाली पीढ़ियों के लिए समस्या बनेगी, इसलिए ग्रामीण विरोध में एकजुट हैं। घाटकुरी मानकी सुरेश चांपिया ने तो यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वे रोड जाम करेंगे और तीर-धनुष के साथ विरोध तेज करेंगे।

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“ग्रामसभा से बिना अनुमति सेंचुरी का कोई औचित्य नहीं” – आदिवासी प्रतिनिधि

सभा में महिलाओं और युवाओं ने भी अपनी समस्याएं रखीं। पंचायत समिति सदस्य महिला तारासोय ने कहा कि ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्या आज भी जस की तस है। उन्होंने कहा कि डीएवी स्कूल खोलने की मांग ग्रामीण क्षेत्र के लिए की गई थी, लेकिन उसका संचालन चिड़िया में हो रहा है, जिससे यहां के बच्चों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। कई युवाओं ने कहा कि वे आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी बेरोजगार हैं। मोताय सिद्धू ने विरोध तो जताया, लेकिन न्यायपालिका और सरकार से भरोसा न खोने की अपील भी की।

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महिला प्रतिनिधियों ने शिक्षा और सड़क समस्या उठाई, युवाओं ने बेरोजगारी पर जताई चिंता

सभा में कई वक्ताओं ने सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट के सामने सारंडा की स्थिति रखने की मांग की। टोंटो गांव के बुधराम लागुरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की तरह झारखंड को भी उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने पुराने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सारंडा लाइम स्टोन प्लांट की स्थिति से ग्रामीणों को पहले ही नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए स्थिति की जांच जरूरी है। गांगदा गांव के वार्ड सदस्य गुलयान चांपिया, पूर्व मुखिया कपिलेश्वर दोंगो और कई अन्य वक्ताओं ने कहा कि सेंचुरी बनाना आदिवासी संस्कृति को नष्ट करने की योजना है।

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सुप्रीम कोर्ट में सारंडा की हकीकत रखने की मांग, ग्रामीणों ने उठाया कोल विद्रोह का जिक्र

सभा की अध्यक्षता करते हुए मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि झारखंड सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करती है और ग्रामीणों की भावनाओं को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने पांच सदस्यीय समिति इसी उद्देश्य से बनाई है ताकि जनता की राय को अदालत के सामने रखा जा सके। हालांकि खराब मौसम के कारण मंत्री राधाकृष्ण किशोर, चमरा लिंडा, संजय प्रसाद यादव और दीपिका पांडे सिंह नहीं पहुंच सके। मंच पर सांसद जोबा माझी, विधायक सोनाराम सिंकू, विधायक जगत माझी और कई अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। अंत में निष्कर्ष यह निकला कि सारंडा में विकास बनाम अधिकार की जंग छिड़ी है और अब फैसला सर्वोच्च न्यायालय और सरकार को मिलकर लेना है।


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