जमशेदपुर: चाईबासा ब्लड बैंक में गड़बड़ी उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी ब्लड बैंकों की जांच शुरू कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार को राज्यस्तरीय टीम महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल के ब्लड बैंक का निरीक्षण करने पहुंची।
टीम ने कई बिंदुओं पर की गहन जांच
टीम में एमजीएम अधीक्षक डॉ. आर.के. मंधान और असिस्टेंट ड्रग इंस्पेक्टर गौरव कुमार शामिल थे। उन्होंने रक्त भंडारण की व्यवस्था, सेफ्टी उपकरण, स्टाफ की योग्यता, रिकॉर्ड मेंटेनेंस और ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि अधिकांश व्यवस्था संतोषजनक है, लेकिन कुछ तकनीकी सुधार जरूरी हैं।
पुराने नाम से चल रहा नया ब्लड बैंक
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि एमजीएम का नया ब्लड बैंक अभी भी साकची स्थित पुराने ब्लड बैंक के नाम से संचालित हो रहा है, जो नियमानुसार गलत है। इस पर एमजीएम प्रबंधन ने बताया कि नए नाम से लाइसेंस के लिए आवेदन पहले ही भेजा जा चुका है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
सीबी नेट मशीन की कमी से जांच प्रभावित
टीम ने यह भी पाया कि ब्लड बैंक में अभी तक सीबी नेट मशीन नहीं लगाई गई है। इसके कारण एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और सी की जांच के लिए सैंपल रांची रिम्स भेजे जा रहे हैं। बुधवार को रांची पहुंचे केंद्रीय निरीक्षण दल ने भी सुझाव दिया था कि रिम्स में एक अतिरिक्त सीबी नेट मशीन लगाई जाए ताकि जांच कार्य और जिलों में भी सुचारू हो सके।
राज्यस्तरीय टीम ने एमजीएम प्रबंधन को ब्लड बैंक के सभी कार्यों को पूरी तरह ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ने के निर्देश दिए। इसी अभियान के तहत नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ब्लड बैंक का भी निरीक्षण किया गया। दो सदस्यीय टीम में एमजीएम के उपाधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी और ड्रग इंस्पेक्टर गौरव कुमार शामिल थे। उन्होंने सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच की। जांच रिपोर्ट शुक्रवार तक तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपी जाएगी।




















































