भूमिज भाषा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग
जादूगोड़ा : भारतीय आदिवासी भूमिज़ समाज झारखंड सरकार से खफा है. इसका इजहार समाज के लोगों ने एक बैठक कर जताया. जादूगोड़ा रकणी मंदिर में रविवार को भारतीय आदिवासी भूमिज़ समाज की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता दिनेश सरदार ने की. इधर बैठक में आदिवासी जनजाति भूमिज समाज के लोगों ने हेमंत सरकार द्वारा भूमिज समाज की अनदेखी व अधिकार से वंचित किए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की व अपने गुस्से की इजहार किया.
द्वितीय राजभाषा का मिला है दर्जा
बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि झारखंड सरकार ने भूमिज भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा तो दिया है. लेकिन इस भाषा को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है. टेट परीक्षा में भी पूर्व में मिले भूमिज कोड को हटा दिया है. पेसा कानून के प्रारूप में ही भूमिज भाषा को जगह नहीं दी गई है. जिसका भूमिज समाज विरोध जता रहा है. भूमिज समाज स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग कर रही है. बहरहाल देखना है कि भूमिज समाज की मांगों को झारखंड सरकार कितनी संजीदगी से लेती है. गौरतलब हो कि झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का पोटका विधानसभा क्षेत्र एक मात्र भूमिज बहुल सीट है। उनकी अपनी अलग परंपरा व भाषा है.
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : दिल्ली हादसा रेल मंत्रालय की नाकामी व खराब प्रबंधन का नतीजा : महेंद्र पाण्डेय
बैठक में यह लोग रहे मौजूद
बैठक में भारतीय आदिवासी भूमिज समाज की ओर से भारतीय अदिवासी भूमिज समाज के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार, केन्द्रीय संगठन सचिव देवनाथ सिंह सरदार, सचिव अबोध सिंह, केन्द्रीय सदस्य विमल भूमिज, मनोहर सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जय सिंह भूमिज, प्रवक्ता युधिष्ठिर सरदार, प्रदेश के अध्यक्ष रथु सिंह, सचिव शुभंकर सिंह, जिला अध्यक्ष सुसेन सिंह, प्रखण्ड सचिव रविन्द्र नाथ सिंह, सोनाराम भूमिज, गुमान सिंह भूमिज, छुटू सिंह, रवींद्र सिंह सरदार, अभिमन्यु सरदार, लखीपदो सिंह, रामेश्वर सरदार शामिल हुए.
इसे भी पढ़ें : Jadugoda : जादूगोड़ा में महिलाओं ने जिम को शिफ्ट करने की मांग की
There is no ads to display, Please add some



















































