पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीटों की संख्या पर सहमति बनने के बाद अब एनडीए (राजग) में विधानसभा क्षेत्रों के बंटवारे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सहयोगियों को मनाने और टकराव सुलझाने के लिए भाजपा नए सिरे से रणनीति बना रही है।
सीट पहचान पर विवाद, मांझी और कुशवाहा नाराज़
राजग के सहयोगियों में यह तय हो गया था कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर लड़ेगी, लेकिन किन सीटों पर कौन उतरेगा—यह तय नहीं हो सका।
कुछ सीटों पर हम और आरएलएम के नेताओं—जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा—ने दावा ठोक दिया, जिससे जदयू में नाराजगी बढ़ गई। सूत्रों के अनुसार भाजपा, दोनों दलों को मनाने के लिए अपने कोटे से एक-एक अतिरिक्त सीट देने पर विचार कर रही है। फिलहाल विवादित सीटों पर किसी भी दल को उम्मीदवार घोषित न करने के लिए मना लिया गया है।
जदयू में असंतोष, संजय झा पर सवाल
बीते चुनाव की कुछ अहम सीटें लोजपा (रामविलास) को दिए जाने से जदयू नेतृत्व पहले से ही असंतुष्ट था। खास तौर पर तारापुर, सोनबरसा, राजगीर और मोरवा जैसी पारंपरिक सीटों पर समझौते को लेकर पार्टी में नाराजगी है। जदयू के भीतर कुछ नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा पर पार्टी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। तनाव बढ़ने पर झा को सोशल मीडिया पर सफाई देनी पड़ी कि “सारे फैसले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लिए जा रहे हैं।”
भाजपा की नई रणनीति: जदयू फिर बनेगा “बड़ा भाई”?
भाजपा में चिंता है कि विपक्ष यह छवि बना रहा है कि नीतीश कमजोर पड़ गए हैं। भाजपा चाहती है कि यह संदेश जाए कि राज्य में राजग का चेहरा अब भी नीतीश कुमार हैं। इसके तहत भाजपा अपने हिस्से से मांझी और कुशवाहा को सीटें देकर जदयू को 101 सीटों की हिस्सेदारी दिला सकती है, जिससे वह फिर “बड़े भाई” की भूमिका में आ जाए। खबर है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच भी बातचीत हुई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
शाह की सक्रियता, आज मिल सकता है समाधान
तनातनी और नाराजगी की खबरों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने फिर सक्रिय भूमिका संभाली है। सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को उन्होंने पूरे दिन सहयोगी दलों के नेताओं से बातचीत की। संभावना जताई जा रही है कि बुधवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा हो सकती है।


















































