जमशेदपुर : ग्रेजुएट कॉलेज के हिन्दी विभाग ने स्वतंत्रता सेनानी, कवि और पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी उपस्थित रहीं.
भारतीय आत्मा की आवाज़ थी उनकी कविताएं
प्राचार्या डॉ. प्रियदर्शी ने अपने उद्बोधन में कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी की कविताएं भारतीयता की सजीव प्रतिमूर्ति हैं. उनकी रचनाएं देशभक्ति की भावना जागृत करती हैं और इसीलिए उन्हें ‘भारतीय आत्मा’ की संज्ञा दी गई है. उनकी अमर रचना ‘पुष्प की अभिलाषा’ आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवंत है, जो उनकी लेखनी की व्यापक लोकप्रियता को दर्शाती है.
कवि, क्रांतिकारी और पत्रकार
हिन्दी विभागाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी केवल एक कवि ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा भी थे. उन्होंने गांधी जी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जेल भी जाना पड़ा. उनकी पत्रकारिता ने भी स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी. भोपाल में उनके नाम पर स्थापित पत्रकारिता विश्वविद्यालय इस बात का प्रमाण है कि उनकी लेखनी ने समाज में गहरी छाप छोड़ी. जेल में रहते हुए उन्होंने ‘कैदी और कोकिला’ जैसी कालजयी कविता लिखकर ब्रिटिश शासन की क्रूरता को उजागर किया था.
छात्राओं की सहभागिता
संगोष्ठी में सेमेस्टर 1 की छात्रा नैन्सी आर्या ने माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन पर प्रकाश डाला. सेमेस्टर 4 की छात्रा अनुभा कुमारी ने उनकी प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ का सस्वर पाठ किया. सेमेस्टर 1 की नंदनी सेन ने संगोष्ठी का संचालन किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सेमेस्टर 4 की छात्रा नुपुर डे ने प्रस्तुत किया.
उल्लेखनीय उपस्थिति
इस अवसर पर हेमलता कुमारी, प्रियंका कुमारी, दिव्या कुमारी, निकिता गुरूंग, काजल सिंह, पुनम कुमारी, अन्नु कुमारी, डॉली कुमारी, रीना महतो, लक्ष्मी कुमारी, प्रिया थावे, प्रिया कुमारी, सौम्या उरांव, सोनी कुमारी, संचिता चौधरी, लक्की कुमारी सहित सेमेस्टर 1, 2 और 4 की अनेक छात्राएं उपस्थित रहीं.
माखनलाल चतुर्वेदी का साहित्य न केवल काव्य प्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम की भावनाओं को भी अभिव्यक्त करता है. उनकी कविताएं और पत्रकारिता आज भी राष्ट्रप्रेम की भावना को जीवंत बनाए हुए हैं.
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