
रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और दो प्रमुख मांगें रखीं—पहली, सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच हो तथा दूसरी, रांची के नगड़ी इलाके की 227 एकड़ जमीन आदिवासियों को लौटाई जाए।
मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत को “सुनियोजित हत्या” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 अगस्त को नावाडीह गांव से गिरफ्तारी के बाद महगामा ले जाते वक्त उनकी हत्या कर दी गई और उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया। मरांडी ने कहा कि सूर्या एक सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्ति थे, जिन्होंने बोरियो सीट से चार बार चुनाव लड़ा और कोयला-बालू माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाई। उनके अनुसार, 24 में से 14 मामलों में सूर्या बरी हो चुके थे, जबकि 2020 के बाद 9 नए केस दर्ज किए गए।
मरांडी ने नगड़ी की जमीन को आदिवासियों की “भूईहरी और खेतीहर जमीन” बताते हुए सरकार पर जबरन अधिग्रहण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 1956-57 में अधिग्रहण की कोशिश असफल रही थी और 2012 में भी ग्रामीणों के विरोध के चलते सरकार पीछे हटी थी। उनके अनुसार, आरटीआई के जवाब में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने साफ कहा है कि उनके पास अधिग्रहण से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं हैं।
मरांडी ने सरकार से मांग की कि विधानसभा में घोषणा कर रैयतों के हक को सुरक्षित किया जाए, उन्हें रसीद काटने और खेती-बाड़ी जारी रखने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा, “ये दोनों मुद्दे सीधे तौर पर झारखंड के आदिवासी समाज से जुड़े हैं और इनके लिए हम सड़क से सदन तक संघर्ष करेंगे।”
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