चांडिल: नीमडीह प्रखंड के लुपुंगडीह स्थित नारायण आईटीआई परिसर में भगवान बुद्ध की जयंती श्रद्धा और आदर के साथ मनाई गई. इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने भगवान बुद्ध के जीवन और दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला.
राजपुत्र से विश्वगुरु तक की यात्रा
डॉ. पांडे ने कहा कि भगवान बुद्ध का जन्म एक समृद्ध राजघराने में हुआ था. उनका जन्मस्थान लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) है. मात्र 29 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग दिया और सत्य की खोज में निकल पड़े. पांच वर्षों की कठोर तपस्या के बाद बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई.
उन्होंने आगे कहा कि बुद्ध ने जिस करुणा, दया और अहिंसा का संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणास्पद है.
विश्व में फैला उनका ज्ञान
डॉ. पांडे ने यह भी उल्लेख किया कि चीन, जापान सहित अनेक देश आज भी भगवान बुद्ध के दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं. यह भारत के लिए गर्व की बात है कि ऐसे महान संत, दार्शनिक और आध्यात्मिक नेता का जन्म इसी भूमि पर हुआ. उन्होंने कहा कि यदि आज विश्व को शांति चाहिए, तो बुद्ध के बतलाए मार्ग पर चलना ही एकमात्र उपाय है.
श्रद्धांजलि में अनेक गणमान्य उपस्थित
इस अवसर पर अधिवक्ता निखिल कुमार, अधिवक्ता अशोक कुमार झा, शांतिराम महतो, पवन कुमार महतो, अजय कुमार मंडल, प्रकाश महतो, संजीत महतो, देवाशीष मंडल, गौरव महतो और शुभम साहू सहित कई अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे.
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