
झाड़ग्राम: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को झाड़ग्राम स्टेडियम में आयोजित चार दिवसीय राज्य स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस समारोह का भव्य शुभारंभ किया। प्रतिवर्ष 9 अगस्त को मनाए जाने वाले इस दिवस का आयोजन इस बार पूर्ववर्ती रूप से शुरू हुआ है। इस अवसर पर आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हुए नृत्य, गीत और अन्य पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान मंच से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “झाड़ग्राम अब विकास का प्रतीक बन गया है। एक समय था जब लोग यहां आने से डरते थे, लेकिन अब यहां रौशनी और तरक्की की तस्वीर साफ़ है।”
आदिवासियों को मिलेगा ज़मीन का मालिकाना हक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन को ‘रैयतो’ ज़मीन पर रह रहे आदिवासी परिवारों को मालिकाना हक़ जल्द से जल्द देने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने माओवादी हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की राज्य सरकार की नीति की भी पुष्टि की।
बनर्जी ने अपने संबोधन में महिला शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा “लड़कियों की शादी कम उम्र में न करें। उन्हें शिक्षित करें, आत्मनिर्भर बनाएं। लड़कियाँ डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बन सकती हैं। उन्हें उड़ने दीजिए।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा मुफ़्त राशन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे हर वर्ग को लाभ मिल रहा है।
एनआरसी और मतदाता सूची से नाम हटाने की आशंकाओं को लेकर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया “सुनियोजित तरीके से लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाया जा रहा है। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
भाषाई अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्होंने कहा “अगर हम अपनी भाषा बोलते हैं तो हमें अत्याचार क्यों सहना पड़े? मथुरा में एक युवक को सिर्फ़ बंगाली बोलने के कारण मारा गया। ये बर्दाश्त नहीं होगा।”
मुख्यमंत्री ने बंगाली भाषा के गौरव पर भी बल देते हुए कहा कि उन्होंने अपने फोन में 1912 का एक दस रुपये का बंगाली नोट सुरक्षित रखा है। उन्होंने कहा “हम सभी भाषाएं जानते हैं, लेकिन हम अपनी मातृभाषा और अधिकार कभी नहीं छोड़ेंगे। कोई भी बंगाली माताओं, बहनों, किसानों को बदनाम नहीं कर सकता।”
उन्होंने भर्ती घोटाले के चलते नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार परीक्षाएं फिर से आयोजित की जा रही हैं और सरकार उनके साथ खड़ी है।
अपने भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने डबल इंजन सरकार को निशाने पर लेते हुए दो टूक कहा “बंगाल के छात्र, किसान और ईमानदार लोग अन्याय नहीं सहेंगे। हम न भाषा छोड़ेंगे, न अधिकार।”
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