जमशेदपुर: आईआईटी खड़गपुर के एग्रीकल्चर एंड फूड इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रगतिशील किसानों ने बर्मी कम्पोस्ट बनाने की उन्नत तकनीक सीखी. इस प्रशिक्षण का नेतृत्व विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. दिलीप कुमार स्वांग ने किया.
प्रशिक्षण में किसानों को बर्मी कम्पोस्ट की वैज्ञानिक विधियों, कचरे के उचित प्रबंधन, केंचुआ प्रजनन और जैविक खाद की गुणवत्ता बनाए रखने की गहन जानकारी दी गई. प्रशिक्षकों में डॉ. झूमर मजुमदार और बिक्रम भुइयां भी शामिल थे.
जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा, महिला किसानों ने भी दिखाया उत्साह
इस अवसर पर झारखंड एवं बंगाल के कई किसान कृषि विशेषज्ञ डॉ. अमरेश महतो के मार्गदर्शन में शामिल हुए. प्रशिक्षण में महिला किसान पूर्णिमा महतो, बेला रानी महतो, संजीव महतो, सत्यनाथ महतो और दीनबंधु ट्रस्ट के महासचिव नागेन्द्र कुमार ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
सभी प्रतिभागी अब अपने क्षेत्रों में उन्नत जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं, जिससे न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि मृदा की उर्वरता और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी.
IIT के सामने प्रस्तुत की गई पुआल छत्तू और शुगर फ्री शकरकंद
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अमरेश महतो ने अपनी नवाचार आधारित उपज—पेडी स्ट्रॉयड मशरूम (पुआल छत्तू) और शुगर फ्री शकरकंद—भी IIT खड़गपुर के अधिकारियों को भेंट की. यह उपज तकनीकी नवाचार की मिसाल है, जो जैविक खेती की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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