
जमशेदपुर: काशीडीह मारवाड़ी समाज द्वारा मंगलवार को बिस्टुपुर स्थित श्री सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर (श्री श्याम मंदिर) में पारंपरिक चतड़ा चौथ सिंधारा महोत्सव का आयोजन किया गया। लंबे समय से भुला दिए गए इस त्योहार को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई।
यह आयोजन खासतौर पर 8 से 25 वर्ष तक के युवाओं और नवविवाहित जोड़ों के लिए किया गया। आयोजकों का कहना था कि इसका मकसद केवल त्योहार मनाना नहीं बल्कि समाज में एकता, मेल-जोल और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना भी है।
महोत्सव में गुड़धानी, डंका, खेल-मनोरंजन गतिविधियाँ, पुरुषों को मेहंदी लगाना, संगीत और पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। सभी खेलों और प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल सह पत्नी मीना अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने काशीडीह समाज को इस भूली हुई परंपरा को पुनर्जीवित करने पर बधाई दी।
पूर्वी सिंहभूम जिला मारवाड़ी सम्मेलन अध्यक्ष मुकेश मित्तल और उनकी पत्नी ममता मित्तल ने भी आयोजन की सराहना की। कार्यक्रम की रचना करने वाले जिला महासचिव प्रदीप कुमार मिश्रा की सभी ने प्रशंसा की।
आयोजन की सफलता में नारी शक्ति विंग का विशेष योगदान रहा। संगीता शर्मा के नेतृत्व में स्वाति अग्रवाल, राखी शर्मा, रश्मि अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने मिलकर पूरे आयोजन को यादगार बनाया। संचालन रश्मि अग्रवाल और मेनका शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्वाति अग्रवाल ने दिया।
महोत्सव में भारी संख्या में युवा, महिलाएं और समाज के वरिष्ठजन शामिल हुए। नारी शक्ति विंग ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ना था।
इसे भी पढ़ें : Chaurchan Puja 2025: 27 अगस्त को पूरे उल्लास से मनाई जाएगी चौरचन पूजा, होगी कलंकित चंद्रमा की आराधना