- अष्टमी-नवमी पर होता है विशेष आयोजन, सैकड़ों भक्त बनते हैं साक्षी
- बकरे की बलि और खून पीने की रस्म से जुड़ी श्रद्धालुओं की आस्था
सरायकेला : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के लूपुंगडीह पंचायत अंतर्गत उगडीह टोला सोशानटॉड गांव स्थित मां दुर्गा मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां 2017 से कार्तिक सिंह और उनकी पत्नी प्रमिला सिंह विशेष पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। प्रमिला सिंह का दावा है कि मां दुर्गा ने उन्हें स्वप्न में आदेश दिया था कि वे मंदिर में नियमित पूजा करें। मंदिर में भक्तों की मनोकामना पूरी होने की मान्यता है, और हर वर्ष अष्टमी व नवमी के दिन ढाक, शंख, घंटा और धूप-धुना के साथ विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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मां दुर्गा मंदिर में स्वप्न आदेश से शुरू हुई पूजा परंपरा
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा बखरे की बलि से जुड़ी है। बलि के समय महिलाएं मिट्टी की कोटरा लेकर नृत्य करते हुए मंदिर परिसर से निकलती हैं और बखरे का खून उन कोटरों में लेकर पी जाती हैं। यह दृश्य हर साल सैकड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। विशेषकर महिलाएं इस रस्म का हिस्सा बनकर अपनी आस्था को व्यक्त करती हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस अनुष्ठान से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मंदिर पहुंचते हैं।
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