Gua : मेघाहातुबुरु में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम,  खदान क्षेत्र से निकलने वाले गंदे एवं तेलयुक्त पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन करने के लिए लगा 10 KLD इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट

गुवा : मेघाहातुबुरु खदान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण को सशक्त बनाने की दिशा में सेल प्रबंधन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जनरल ऑफिस के समीप डोजर-डम्फर सेक्शन में 10 केएलडी क्षमता वाले इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का विधिवत उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक संयंत्र का उद्घाटन महाप्रबंधक प्रभारी संजय कुमार सिंह ने फीता काटकर किया।

इस अवसर पर महाप्रबंधक योगेश प्रसाद राम, नवीन कुमार सोनकुशरे, के.बी. थापा, मनोज कुमार, प्रमोद कुमार, उप महाप्रबंधक संजय कुमार, रमेश सिन्हा, अवधेश कुमार, जगदीश यादव, एम.एन. रूंडा, मोहन कुमार, रोहित टोप्पो, अजय कुमार, अफताब आलम सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस ईटीपी का निर्माण हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित ठेका कंपनी एमएस एक्वा टेकनीक द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि परेश कुमार झा के नेतृत्व में किया गया है।

यह संयंत्र खदान क्षेत्र से निकलने वाले गंदे एवं तेलयुक्त पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन करेगा। महाप्रबंधक प्रभारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि खदान क्षेत्र में भारी मशीनों और वाहनों की मरम्मत व धुलाई के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट जल में ग्रीस, डीजल, मोबिल और अन्य लुब्रिकेंट्स की मात्रा रहती है। यदि यह पानी बिना उपचार के बाहर निकलता है तो मिट्टी, जंगल और प्राकृतिक जलस्रोतों के प्रदूषण का खतरा बना रहता है। अब ईटीपी के माध्यम से इस पानी को शुद्ध कर पुनः उपयोग में लाया जा सकेगा।

डोजर-डम्फर सेक्शन खदान संचालन का अहम हिस्सा है, जहां प्रतिदिन कई भारी मशीनों की मरम्मत और सफाई होती है। पहले इन गतिविधियों से निकलने वाला तेलयुक्त पानी आसपास फैलकर मिट्टी की गुणवत्ता और वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाता था। नए संयंत्र के शुरू होने से अब अपशिष्ट जल का उपचार कर उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों को अलग किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय क्षति पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

ईटीपी की खास बात यह है कि शोधन के बाद प्राप्त जल का पुनः उपयोग किया जा सकेगा। इससे ताजे पानी की खपत कम होगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। खदान क्षेत्रों में बढ़ती जल जरूरतों को देखते हुए यह पहल एक दूरदर्शी कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, खनन गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं।

ऐसे में ईटीपी जैसे संयंत्र प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जिम्मेदार और टिकाऊ खनन व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सेल मेघाहातुबुरु द्वारा स्थापित यह संयंत्र हरित खनन (ग्रीन माइनिंग) और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सारंडा के घने जंगलों और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में भी सार्थक योगदान देगा।

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