BJP का मिशन बिहार : सीट शेयरिंग का फॉर्मुला लगभग तय, चिराग-मांझी को मिल सकती हैं इतनी सीटें

Lok Sabha Election 2024: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख गठबंधनों की राजनीति में कई तरह की अनिश्चितताएं देखी जा रही हैं। एनडीए में बेशक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोई विकल्प नहीं है।
फिर भी कई तरह की अफवाहों को उछाला जा रहा है। इससे जदयू एवं भाजपा में दूसरी-तीसरी पंक्ति के नेताओं एवं निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच दुविधा की स्थिति है।

कन्हैया कुमार साध रहे निशाना

तेजस्वी यादव निशाने पर नीतीश कुमार को रखते हैं। कांग्रेस की तरफ से कन्हैया कुमार भी पलायन और बेरोजगारी पर सत्तापक्ष से रोज-रोज सवाल पूछते हैं। सारे सवालों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 अप्रैल के प्रस्तावित मधुबनी दौरे का इंतजार है।
विपक्ष को मिलेगा जवाब

कार्यकर्ताओं को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास

इसके जवाब के लिए लंबा इंतजार करना होगा। फिलहाल इतना तय है कि भाजपा और जदयू के नेता-कार्यकर्ता पूरी तरह आश्वस्त हैं कि चुनाव में जीत की पटकथा नरेंद्र मोदी एवं नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लिखी जाएगी। इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है। इसलिए ऊपर से नीचे तक सारी धुंध को साफ करते हुए दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को एक सूत्र में पिरोने का मजबूत प्रयास जारी है।

जदयू-भाजपा के बीच कोई दरार-तकरार नहीं

इसके माध्यम से भाजपा को नीतीश कुमार के वोट बैंक को भी सहेजकर रखने में आसानी होगी।केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने के बाद से बिहार में जदयू-भाजपा के बीच कोई दरार-तकरार नहीं है। गठबंधन में पहले से भी ज्यादा मजबूती दिख रही है।

ललन सिंह भी अति सक्रिय

यही कारण है कि पीएम मोदी की मधुबनी वाली सभा को सफल बनाने की कवायद में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह भी अति सक्रिय हैं। इसके पहले भी बिहार में राजग के सभी घटक दलों की प्रमुख नेताओं की बैठक हो चुकी है।

जदयू को काफी नुकसान हुआ

हालांकि, उनके बयानों के बाद जदयू कार्यकर्ताओं में खलबली है। इसे पिछले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जब उन्होंने जदयू के हिस्से वाली सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए थे, जिससे जदयू को काफी नुकसान हुआ था। इस बार चिराग ऐसा दुस्साहस जुटाने से परहेज करेंगे, क्योंकि तब वह केंद्र में मंत्री नहीं थे। अब की बात कुछ और है।

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