चांडिल: 20 सितंबर को कुड़मी समाज द्वारा आयोजित रेल टेका–डहर छेका आंदोलन के बाद रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए हरे लाल महतो सहित पांच नामजद और लगभग 500–600 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया है।
दर्ज एफआईआर में आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो, झारखंड आंदोलनकारी नेता सुनील महतो, आदिवासी कुड़मी समाज के नेता प्रभात महतो, बादल महतो और अन्य प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। इस कदम से स्पष्ट हो गया है कि रेलवे प्रशासन अब आंदोलन को लेकर बेहद सख्त है।
20 सितंबर को कुड़मी समाज ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा, कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने, और सरना धर्म कोड की मांग को लेकर रेल ट्रैक जाम कर दिया था।
स्थान: हेंसालौंग स्टेशन, नीमडीह थाना क्षेत्र, चांडिल अनुमंडल
समय: लगभग 11 घंटे तक यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन ठप
कई ट्रेनें जैसे बड़काकाना–टाटा लोकल घंटों रुकी रहीं।
रेलवे को आर्थिक नुकसान भी हुआ।
एफआईआर दर्ज होने पर हरे लाल महतो ने कहा “कुड़मी समाज की मांग पूरी तरह जायज है। अपनी पहचान और अस्तित्व के लिए संघर्ष करना ही होगा। किसी भी आंदोलन में कीमत चुकानी पड़ती है और कुड़मी समाज इसके लिए तैयार है। हम किसी भी कीमत पर अपना हक लेकर रहेंगे।”
रेलवे प्रशासन की कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यह मुद्दा अब केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे झारखंड की सियासत में प्रवेश कर गया है। आने वाले दिनों में इसके असर और गहरा होने की संभावना है।




















































