Dussehra 2025: बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व, शोधकर्ताओं का दावा — रावण का शव आज भी सुरक्षित है

नई दिल्ली:  हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष दशहरा 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने अहंकार से भरे लंकापति रावण का वध किया था और धर्म, सत्य तथा न्याय की जीत सुनिश्चित की थी।

दूसरी ओर, देवी महिषासुरमर्दिनी के रूप में मां दुर्गा ने इसी तिथि पर महिषासुर का वध किया था। इस कारण दशहरा को शक्ति और धर्म की विजय का प्रतीक पर्व कहा जाता है। देशभर में इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है — जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

श्रीलंका में अब भी मौजूद हैं रावण से जुड़े स्थल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीलंका में आज भी ऐसे कई स्थान हैं जो रामायण काल से जुड़े माने जाते हैं। इनमें अशोक वाटिका, पुष्पक विमान स्थल और हनुमान के पदचिह्न जैसे स्थल प्रमुख हैं। हाल ही में हुए एक शोध में दावा किया गया है कि श्रीलंका के रैगला क्षेत्र के घने जंगलों में स्थित एक गुफा में रावण का शव सुरक्षित अवस्था में मौजूद है। यह गुफा लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बताई जाती है।

गुफा में रखा है रावण का ममी बना शव
श्रीलंका के इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए शोध में दावा किया गया है कि रावण के शव को ममी बनाकर एक ताबूत में रखा गया है। इस ताबूत की लंबाई लगभग 18 फीट और चौड़ाई 5 फीट बताई जाती है। कहा जाता है कि शव पर एक विशेष लेप लगाया गया है जिसकी वजह से वह हजारों वर्षों से सुरक्षित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ताबूत के नीचे रावण का बेशकीमती खजाना भी छिपा है जिसकी रखवाली एक नाग और कुछ वन्य जीव करते हैं। हालांकि इन दावों की अब तक किसी वैज्ञानिक संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

विभीषण ने नहीं किया अंतिम संस्कार?
कुछ मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उसके भाई विभीषण को सौंपी थी। लेकिन विभीषण के राजगद्दी संभालने की जल्दी के कारण रावण का अंतिम संस्कार नहीं हो सका और उसका शरीर गुफा में ही छोड़ दिया गया।

प्रमाणिकता पर अब भी सवाल
रामायण रिसर्च सेंटर का दावा है कि उसने रावण की अशोक वाटिका, पुष्पक विमान स्थल और अन्य स्थानों की भी पहचान कर ली है। हालांकि अब तक इन तथ्यों को किसी पुरातात्त्विक या वैज्ञानिक संस्था द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया है।

 

 

 

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