
रांची: रांची के सदर अस्पताल से बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां थैलेसीमिया से पीड़ित एक बच्चे को ब्लड चढ़ाया गया जिसके बाद वह HIV से संक्रमित पाया गया। इस घटना को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य के स्वास्थ्य सचिव तथा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को हो सकती है।
बच्चे के पिता ने इस गंभीर घटना को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इसके बाद कोर्ट ने तुरंत इस पर कार्रवाई की और संबंधित अधिकारियों को तलब किया।
सदर अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि यह मामला करीब आठ महीने पुराना है और इसकी तीन बार जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि हर रक्त यूनिट की तीन स्तर पर जांच होती है, लेकिन “विंडो पीरियड” की वजह से शुरुआती चरण में HIV संक्रमण की पहचान नहीं हो पाती।
ब्लड जांच के जरूरी नियम
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार किसी भी रक्त को सुरक्षित मानने से पहले उसकी पांच अहम जांच अनिवार्य है—
HIV जांच – एड्स से बचाव के लिए
HBS एंटीजन – हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए
Anti-HCV – हेपेटाइटिस सी की पहचान के लिए
सिफलिस जांच (VDRL/TPHA) – यौन संचारित रोगों की रोकथाम के लिए
मलेरिया परजीवी जांच – रक्त से मलेरिया न फैले इसके लिए
कई ब्लड बैंकों में आधुनिक एनएटी टेस्ट, रक्त समूह और हीमोग्लोबिन स्तर की जांच भी की जाती है ताकि मरीज तक सुरक्षित ब्लड ही पहुंचे।
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